हरीश राणा को खाना-पानी देना बंद, एम्स के डॉक्टर अब तक पाइस से दे रहे थे भोजन, सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की मंजूरी के बाद की जा रही प्रक्रिया
- Shiv Kumar
- 17 Mar, 2026
गाजियाबाद के 31 वर्षीय हरीश राणा के मामले में मंगलवार से इच्छामृत्यु की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है। 13 साल से कोमा में पड़े हरीश को अब पानी देना भी बंद कर दिया गया है। इससे पहले उन्हें ट्यूब के जरिए खाना दिया जा रहा था, जिसे पहले ही रोक दिया गया था। जानकारी के अनुसार, अब ट्यूब पर कैप लगा दिया जाएगा, हालांकि उसे शरीर से निकाला नहीं जाएगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉक्टरों की टीम हर पल उनकी स्थिति पर नजर रख रही है और तय प्रोटोकॉल के तहत धीरे-धीरे जीवन रक्षक प्रक्रियाएं हटाई जा रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने इस पर आधिकारिक बयान देने से फिलहाल परहेज किया है।
सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश राणा को ‘निष्क्रिय इच्छामृत्यु’ (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी थी। इसके बाद 14 मार्च को उन्हें गाजियाबाद स्थित घर से दिल्ली एम्स शिफ्ट किया गया। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 16 मार्च से पूरी प्रक्रिया शुरू की गई। डॉक्टरों की टीम ने एक विस्तृत बैठक के बाद चरणबद्ध तरीके से फीडिंग और ऑक्सीजन सपोर्ट हटाने का निर्णय लिया। अब उन्हें पैलिएटिव केयर वार्ड में रखा गया है, जहां उनकी हर स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
परिवार ने बताया मजबूरी, भावुक माहौल
हरीश के परिवार का कहना है कि यह फैसला उन्होंने बेहद मजबूरी में लिया है। उनके पिता अशोक राणा ने कहा कि बेटे की हालत को इतने सालों तक देखते रहना बहुत पीड़ादायक था। परिवार के अनुसार, हरीश न तो अपनी तकलीफ बता पा रहे थे और न ही किसी प्रतिक्रिया देने की स्थिति में थे। इस दौरान परिवार भावुक हो गया और उन्हें ‘भगवान की गोद में सौंपने’ की बात कही। परिवार पिछले कई वर्षों से आध्यात्मिक संस्था ब्रह्मकुमारीज से भी जुड़ा हुआ है।
2013 के हादसे के बाद कोमा में गए थे हरीश
हरीश राणा 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे, तभी एक हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद वह कोमा में चले गए और उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया जैसी गंभीर स्थिति हो गई। पिछले 13 वर्षों से वह पूरी तरह दूसरों पर निर्भर थे। डॉक्टरों के मुताबिक, इस स्थिति में ठीक होने की संभावना बेहद कम होती है। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनके शरीर पर गंभीर घाव भी हो गए थे, जिससे उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
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