गाजियाबाद कोर्ट में महिला वकील की सूझबूझ आई काम, समय रहते सीपीआर देकर बचाई युवक की जान
- Shiv Kumar
- 10 Apr, 2026
गाजियाबाद के जिला न्यायालय परिसर से इंसानियत और तत्परता की एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। यहां एक महिला अधिवक्ता ने समय रहते सीपीआर (हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन प्रक्रिया) देकर एक व्यक्ति की जान बचा ली। इस पूरी घटना का वीडियो सामाजिक माध्यमों पर तेजी से फैल रहा है और लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना फैमिली कोर्ट के पास हुई, जहां एक व्यक्ति अचानक चलते-चलते जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही देर में वहां भीड़ इकट्ठा हो गई, लेकिन शुरुआत में कोई भी व्यक्ति सही तरीके से स्थिति संभाल नहीं पाया।
अचानक गिरे व्यक्ति से मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, व्यक्ति के गिरते ही आसपास मौजूद लोग घबरा गए। कई लोग मदद के लिए आगे आए, लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ रही थी और उसकी सांसें भी सामान्य नहीं थीं। ऐसे में हर पल कीमती बन गया था। भीड़ में मौजूद लोग सिर्फ देख रहे थे, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही थी। इसी दौरान वहां मौजूद एक महिला अधिवक्ता ने साहस दिखाते हुए तुरंत स्थिति को संभालने का फैसला किया।
महिला अधिवक्ता ने दिखाई सूझबूझ
इसी बीच वहां से गुजर रही अधिवक्ता Beena Simran Randhawa ने बिना समय गंवाए मोर्चा संभाला। उन्होंने आसपास के लोगों की मदद से बेहोश व्यक्ति को सीधा लिटाया और उसकी स्थिति का आकलन किया। जब उन्हें महसूस हुआ कि व्यक्ति की सांसें सामान्य नहीं हैं, तो उन्होंने तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, उस समय व्यक्ति का शरीर पूरी तरह शिथिल हो चुका था और स्थिति बेहद गंभीर थी।
लगातार प्रयास से लौट आई सांसें
अधिवक्ता ने करीब 2 से 3 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया। उनके इस प्रयास का असर जल्द ही दिखाई देने लगा और व्यक्ति के शरीर में हलचल होने लगी। धीरे-धीरे उसकी सांसें सामान्य हो गईं, जिससे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। यह पूरा घटनाक्रम वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब तेजी से फैल रहा है। लोग इस वीडियो को देखकर महिला अधिवक्ता की सूझबूझ और हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं।
समाज सेवा से जुड़ी हैं अधिवक्ता
बीना सिमरन रंधावा गाजियाबाद के राजनगर की निवासी हैं और पेशे से अधिवक्ता हैं। उन्होंने बताया कि वह उस समय एक मामले की सुनवाई के लिए न्यायालय जा रही थीं, तभी उन्होंने व्यक्ति को गिरते देखा और तुरंत मदद के लिए आगे बढ़ीं। उन्होंने यह भी बताया कि वह सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित करती हैं, जहां लोगों को सीपीआर जैसी जीवन रक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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