गाजियाबाद पुलिस लाइन के आवासीय क्वार्टर की छत गिरी, विभाग की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
- Shiv Kumar
- 23 Apr, 2026
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस लाइन की जर्जर हालत एक बार फिर सामने आई है। यहां पुलिस लाइन स्थित एक आवासीय क्वार्टर की छत का हिस्सा अचानक गिर गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई भी उसके नीचे मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना में परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए। बताया जा रहा है कि पुलिस लाइन के अधिकांश आवासीय भवन काफी पुराने हो चुके हैं और लंबे समय से उनकी मरम्मत नहीं कराई गई है। ऐसे में यहां रहने वाले पुलिसकर्मी और उनके परिवार लगातार खतरे के बीच जीवन यापन कर रहे हैं। घटना के बाद एक बार फिर इन जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्वार्टर नंबर 186 में छत का हिस्सा गिरा, बढ़ी चिंता
जानकारी के अनुसार, पुलिस लाइन के क्वार्टर नंबर 186 टाइप प्रथम में छत का एक बड़ा टुकड़ा अचानक टूटकर गिर गया। बताया जा रहा है कि यह आवास करीब 40 साल से भी ज्यादा पुराने हैं और समय के साथ इनकी हालत बेहद खराब हो चुकी है। कई क्वार्टरों में दीवारों में दरारें और छतों में कमजोरी साफ नजर आती है। इसके बावजूद अभी तक न तो मरम्मत का कोई ठोस काम हुआ है और न ही पुनर्निर्माण की दिशा में कोई पहल की गई है। जिस परिवार के क्वार्टर में यह घटना हुई, वह भी डर के माहौल में जी रहा है। हालांकि घटना के बाद परिवार ने कोई औपचारिक शिकायत नहीं की, लेकिन अंदर ही अंदर लोगों में भय बना हुआ है।
पुलिसकर्मियों ने जताई चिंता, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
पुलिस लाइन में रहने वाले पुलिसकर्मियों का कहना है कि पुराने सरकारी आवास अब पूरी तरह कमजोर हो चुके हैं। खासकर बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि छतों से पानी टपकता है और लिंटर कमजोर हो जाता है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिवार के साथ रहने वाले कर्मचारियों को हर वक्त डर बना रहता है कि कब कौन-सी छत गिर जाए।
पहले भी हो चुका है हादसा, फिर भी नहीं लिया सबक
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई हो। जुलाई 2025 में भी गाजियाबाद में एक एसीपी कार्यालय के कमरे की छत गिरने से एक दरोगा की मौत हो चुकी थी। उस घटना के बाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने सभी भवनों की जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला। अब एक बार फिर छत गिरने की घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पुलिसकर्मी और उनके परिवार जल्द से जल्द इन जर्जर भवनों की मरम्मत या नए निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
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