सफर होगा आसान! मोदी कैबिनेट ने 6, 970 करोड़ की द्वारका टनल परियोजना को दी मंजूरी

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8.1 KM की द्वारका टनल बनेगी, एयरपोर्ट से नोएडा तक सफर होगा आसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने दिल्ली के लिए एक बड़ी सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने 8.1 किलोमीटर लंबी 6-लेन द्वारका टनल परियोजना को हरी झंडी दे दी है। करीब 6,969.67 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना राजधानी की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ ट्रैफिक जाम कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक बनेगी सीधी कनेक्टिविटी


नई टनल द्वारका एक्सप्रेसवे (NH-248BB) को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी। इसके तहत NH-148AE का निर्माण किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद गुरुग्राम, द्वारका, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पश्चिम दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुगम होगा। इसके अलावा टनल को बरापुल्ला एलिवेटेड रोड से भी जोड़ा जाएगा, जिससे पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गाजियाबाद की ओर जाने वाले यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा।


ट्रैफिक जाम घटेगा, यात्रा का समय होगा कम


सरकार का मानना है कि यह परियोजना दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सबसे व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम करेगी। एयरपोर्ट और गुरुग्राम की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक तेज मार्ग मिलेगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा और ईंधन की भी बचत होगी। यह परियोजना लंबे समय से दिल्लीवासियों की प्रमुख मांगों में शामिल रही है। इसके पूरा होने से राजधानी के सड़क नेटवर्क को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।


रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा


सरकार के अनुसार, परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग 7.54 लाख व्यक्ति-दिन प्रत्यक्ष और 9.8 लाख व्यक्ति-दिन अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से राजधानी में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की सड़क अवसंरचना परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि नई द्वारका टनल परियोजना दिल्ली के आधुनिक परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करेगी।


5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य


सरकार ने इस परियोजना को अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। निर्माण पूरा होने के बाद राजधानी के लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा, जबकि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


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