फिल्म टॉक्सिक के टीजर में इंटीमेट सीन पर बवाल, विरोध में उतरे राजनीतिक दल, कर्नाटक महिला आयोग ने लिया एक्शन!
- Shiv Kumar
- 13 Jan, 2026
आम आदमी पार्टी (आप) की महिला विंग ने कर्नाटक में कन्नड़ सुपरस्टार यश की आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक’ के टीजर को लेकर कड़ा विरोध जताया है। महिला विंग ने टीजर में अश्लील और आपत्तिजनक विजुअल्स होने का आरोप लगाते हुए कर्नाटक राज्य महिला आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का कहना है कि हाल ही में रिलीज हुए इस टीजर की सामग्री महिलाओं और बच्चों की सामाजिक भलाई पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और कन्नड़ संस्कृति के मूल्यों को ठेस पहुंचाती है। आप महिला विंग ने आयोग से मांग की है कि राज्य सरकार को निर्देश देकर इस टीजर को तत्काल वापस लिया जाए या रद्द किया जाए।
महिलाओं और बच्चों की गरिमा पर खतरे का आरोप
आप की राज्य सचिव उषा मोहन ने शिकायत में कहा कि फिल्म का टीजर विशेष रूप से संवेदनशील प्रकृति का है। इसमें दिखाए गए दृश्य कथित तौर पर अश्लील हैं और इस तरह प्रस्तुत किए गए हैं कि वे समाज के कमजोर वर्गों, खासकर महिलाओं और बच्चों पर बुरा असर डाल सकते हैं। उनका कहना है कि बिना किसी उम्र संबंधी चेतावनी या सेंसर के टीजर का सार्वजनिक रूप से जारी होना महिलाओं की गरिमा और नाबालिगों की भावनाओं के लिए नुकसानदेह है। उषा मोहन ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी सामग्री की खुलेआम स्क्रीनिंग सामाजिक नैतिकता के लिए खतरा बन सकती है और इससे युवा पीढ़ी पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
महिला आयोग ने सीबीएफसी को लिखा पत्र
आप की शिकायत के बाद कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी ) को पत्र लिखा है। आयोग ने पत्र में कहा है कि फिल्म ‘टॉक्सिक’ के टीजर में कथित तौर पर ऐसे विजुअल्स हैं, जो महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा सामाजिक भलाई के लिए हानिकारक हो सकते हैं। आयोग ने यह भी दोहराया कि बिना सेंसर और बिना किसी चेतावनी के टीजर का सार्वजनिक प्रसारण न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि कन्नड़ संस्कृति और परंपराओं का भी अपमान करता है। महिला आयोग ने सीबीएफसी से अनुरोध किया है कि वे नियमों के तहत टीजर की समीक्षा करें और इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई सीबीएफसी की जांच रिपोर्ट के बाद तय की जाएगी। महिला आयोग और AAP दोनों का मानना है कि यह कदम फिल्म उद्योग और सार्वजनिक रूप से जारी की जाने वाली सामग्री पर निगरानी के लिहाज से अहम है। आप ने साफ कहा है कि समाज में नैतिकता बनाए रखने और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की शिकायतें जरूरी हैं। पार्टी ने भविष्य में ऐसी सामग्री पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम और कानून बनाने की भी मांग की है।
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