डायबिटीज से बचने के लिए जरूरी है सावधानी, इन आदतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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डायबिटीज का खतरा अब कम उम्र में भी बढ़ रहा है। जंक फूड, मीठे पेय, शारीरिक गतिविधि की कमी, लगातार तनाव, खराब नींद, धूम्रपान और ज्यादा शराब जैसी आदतें जोखिम बढ़ा सकती हैं। समय रहते खान-पान और जीवनशैली में सुधार करके खतरे को कम किया जा सकता है।

डायबिटीज को दुनियाभर के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम माना जाता है और अब कम उम्र में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि लाखों लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में होने के कारण जोखिम में हैं। टाइप-2 डायबिटीज को अक्सर उम्र बढ़ने से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। आनुवंशिकता और उम्र के साथ-साथ खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद और तनाव जैसी रोजमर्रा की चीजों का असर ब्लड शुगर और इंसुलिन पर पड़ता है। अच्छी बात यह है कि जीवनशैली से जुड़ी कई आदतों में बदलाव करके जोखिम को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।


ज्यादा जंक फूड और मीठे पेय की आदत

फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाली चीजों का नियमित सेवन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। वजन बढ़ने के साथ इंसुलिन प्रतिरोध का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ता है। अगर अभी आपको डायबिटीज नहीं है, लेकिन जंक फूड और मीठे पेय का सेवन आपकी रोजमर्रा की आदत बन चुका है, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। खान-पान में सुधार करते हुए फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। रोजाना खाने-पीने की आदतों पर ध्यान देना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। खासकर मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाली चीजों का नियमित सेवन कम करने की कोशिश करनी चाहिए।


दिनभर बैठे रहना भी पड़ सकता है भारी

लंबे समय तक बैठे रहने और नियमित एक्सरसाइज न करने की आदत भी डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकती है। शारीरिक गतिविधि की कमी से वजन बढ़ने के साथ इंसुलिन संवेदनशीलता कम होने का खतरा रहता है। इसके विपरीत नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तेज गति से चलना, साइकिलिंग, तैराकी या दूसरी मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं। सामान्य तौर पर वयस्कों के लिए हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है। इसलिए अगर आपका ज्यादातर समय बैठकर गुजरता है और दिनचर्या में एक्सरसाइज के लिए समय नहीं निकलता, तो अपनी गतिविधि बढ़ाने की कोशिश करना जरूरी है। नियमित रूप से सक्रिय रहना वजन और इंसुलिन संवेदनशीलता से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है।


लगातार तनाव और खराब नींद को न करें नजरअंदाज

तनाव को केवल मानसिक परेशानी समझकर नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कोर्टिसोल और दूसरे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं। ये हार्मोन शरीर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक तनाव और खराब नींद जैसी स्थितियां इंसुलिन संवेदनशीलता और वजन पर भी असर डाल सकती हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति लगातार तनाव, बेचैनी या मानसिक दबाव में रहता है, तो उसे अपनी जीवनशैली और दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। कामकाज और निजी जीवन के दबाव के बीच पर्याप्त आराम और बेहतर नींद को जगह देना जरूरी है। लगातार तनाव की स्थिति को सामान्य मानकर छोड़ने के बजाय समय रहते उसमें सुधार की कोशिश करना भविष्य में डायबिटीज के जोखिम को कम करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।


धूम्रपान और ज्यादा शराब से भी बढ़ सकता है जोखिम

धूम्रपान को आमतौर पर फेफड़ों और हृदय के लिए नुकसानदायक माना जाता है, लेकिन इसका असर ब्लड शुगर और डायबिटीज के जोखिम पर भी पड़ सकता है। अध्ययनों में धूम्रपान को इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाने वाला पाया गया है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह शराब का ज्यादा सेवन वजन बढ़ने, लिवर और शरीर के मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए धूम्रपान और ज्यादा शराब के सेवन से बचना महत्वपूर्ण है। रोजमर्रा की इन आदतों में सुधार के साथ खान-पान, शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद पर ध्यान देना भी जरूरी है। समय रहते जीवनशैली में बदलाव करने से उन जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है, जो आगे चलकर डायबिटीज जैसी बीमारी से जुड़े हो सकते हैं।

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