तिब्बत में देर रात भूकंप से 16 लोगों की मौत, बचाव अभियान जारी, आसपास के देशों में भी महसूस हुए झटके

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तिब्बत के नागकू क्षेत्र में गुरुवार रात 7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। हादसे में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है। सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है। यह क्षेत्र पहले भी भूकंप से प्रभावित रहा है।

तिब्बत के नागकू क्षेत्र में गुरुवार रात 7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इस आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सैकड़ों मकानों को नुकसान पहुंचा है। घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 32 से 54 तक के आंकड़े सामने आए हैं।


ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था भूकंप का केंद्र

चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तरी तिब्बत के नागकू क्षेत्र में जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर था। यह इलाका तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर बताया गया है। भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 8 बजकर 3 मिनट पर भूकंप दर्ज किया गया। झटकों के बाद प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव दलों को सक्रिय किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, कई मकान ढह गए और कुछ क्षेत्रों में सड़क तथा संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई। प्रशासन नुकसान का आकलन करने और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटा है।


तिब्बत में पहले भी भूकंप से हो चुकी है भारी तबाही

तिब्बत भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार हलचल होती रहती है। इन प्लेटों के आपसी दबाव से हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ है और इसी भूगर्भीय गतिविधि के कारण इस क्षेत्र में भूकंप आने का खतरा बना रहता है। जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में भी शक्तिशाली भूकंप आया था। उस आपदा में तिब्बत में 126 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले अप्रैल 2010 में चीन के छिंगहाई प्रांत के युशू में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें कम से कम 2,698 लोगों की जान गई थी और करीब 300 लोग लापता हो गए थे।


अगस्त में बाढ़ और भूस्खलन से भी हुआ था नुकसान

तिब्बत और नेपाल की सीमा के पास अगस्त में बाढ़ तथा भूस्खलन से जुड़ी आपदा ने भी भारी नुकसान पहुंचाया था। पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नदी में गिरने के बाद पानी का बहाव प्रभावित हुआ और बाद में नेपाल की ओर बढ़ते तेज पानी ने कई इलाकों को नुकसान पहुंचाया। इस घटना में नेपाल में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई लोग लापता बताए गए थे। तिब्बत में भी जान-माल का नुकसान हुआ। लगातार सामने आ रही प्राकृतिक आपदाओं के बीच ताजा भूकंप ने क्षेत्र में राहत और सुरक्षा की चुनौती बढ़ा दी है।


तिब्बत में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?

तिब्बत में भूकंप आने की प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है। भारतीय प्लेट धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट पर दबाव डालती है। इससे जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों और भूगर्भीय दरारों में तनाव जमा होता रहता है। जब यह तनाव अचानक निकलता है और चट्टानें खिसकती हैं, तो भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं और धरती हिलने लगती है। यही प्रक्रिया भूकंप कहलाती है। हिमालय और उसके आसपास का क्षेत्र इसी भूगर्भीय गतिविधि के कारण भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।

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