दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर अब दिखेगी हर कोच में कितनी है भीड़
- Babli Ansari
- 31 Oct, 2026
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर सफर करने वाले यात्रियों को अब ट्रेन आने से पहले ही पता चल जाएगा कि किस कोच में कितनी भीड़ है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने प्लेटफॉर्म पर लगे पैसेंजर इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम यानी पीआईडीएस स्क्रीन पर छहों कोचों की अनुमानित ऑक्यूपेंसी दिखाने की सुविधा शुरू कर दी है। यह जानकारी ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने से कुछ समय पहले प्रदर्शित होगी। यात्री स्क्रीन पर C1 से C6 तक दर्ज कोचों का भीड़ स्तर देखकर प्लेटफॉर्म पर अपनी स्थिति बदल सकेंगे और अपेक्षाकृत खाली डिब्बे में सवार हो सकेंगे। पीक आवर में धक्का-मुक्की और दरवाजे पर जमा भीड़ कम करने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
मजलिस पार्क से शिव विहार तक यात्रियों को मिलेगा लाभ
यह सुविधा पिंक लाइन के उस पूरे हिस्से पर लागू की गई है, जो मजलिस पार्क से शिव विहार और मौजपुर-बाबरपुर तक संचालित होती है। इस कॉरिडोर पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री कार्यालय, बाजार, शिक्षण संस्थानों और दूसरे इलाकों तक पहुंचते हैं। सुबह और शाम के व्यस्त समय में कुछ कोचों में यात्रियों का दबाव काफी बढ़ जाता है, जबकि ट्रेन के दूसरे हिस्से में अपेक्षाकृत जगह बची रहती है। अब प्लेटफॉर्म स्क्रीन पर मिलने वाली जानकारी यात्रियों को ट्रेन आने से पहले सही स्थान चुनने में मदद करेगी। डीएमआरसी के मुताबिक, कोचों की स्थिति C1, C2, C3, C4, C5 और C6 के रूप में दिखाई जाएगी। इससे बुजुर्गों, बच्चों के साथ यात्रा करने वालों और सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को खास राहत मिलने की उम्मीद है।
डीएमआरसी के प्रधान कार्यकारी निदेशक, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन अनुज दयाल के अनुसार, यह व्यवस्था कोच में लगाए गए लोड सेंसर की मदद से काम करती है। सेंसर हर डिब्बे का मौजूदा वजन मापते हैं और उसकी खाली स्थिति के वजन से तुलना करते हैं। इसी आधार पर कोच में मौजूद यात्रियों की अनुमानित संख्या या भार प्रतिशत निकाला जाता है। स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली संख्या पूरी तरह अनुमानित होगी, क्योंकि यात्रियों की आवाजाही लगातार बदलती रहती है। फिर भी ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से ठीक पहले मिलने वाला यह संकेत यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। खासकर उन स्टेशनों पर, जहां ट्रेन रुकते ही लोग बिना जगह देखे एक ही दरवाजे की ओर दौड़ पड़ते हैं, वहां यह तकनीक बोर्डिंग को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है।
मैजेंटा लाइन के बाद पिंक लाइन पर लागू हुई व्यवस्था
रियल टाइम कोच ऑक्यूपेंसी दिखाने की सुविधा सबसे पहले मैजेंटा लाइन पर शुरू की गई थी और वहां वर्ष 2022 से इसका इस्तेमाल हो रहा है। मैजेंटा लाइन पर यात्रियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद डीएमआरसी ने इसे पिंक लाइन तक बढ़ाने का फैसला किया। अधिकारियों के मुताबिक, पिंक लाइन पर यह सुविधा लागू करना आसान नहीं था। लाइन का संचालन और रूट संरचना अन्य सीधी लाइनों की तुलना में जटिल है। इसके गोलाकार कॉरिडोर और अलग-अलग दिशाओं में चलने वाली सेवाओं के कारण ट्रेन, कोच और स्टेशन से जुड़ा डेटा आपस में जोड़ना चुनौतीपूर्ण रहा। तकनीकी एकीकरण पूरा होने के बाद अब प्लेटफॉर्म स्क्रीन पर आने वाली ट्रेन के छहों कोचों का अनुमानित भीड़ स्तर दिखाया जा रहा है। डीएमआरसी इसे यात्री सुविधा और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की दिशा में अगला कदम बता रहा है।
इस प्रणाली का उद्देश्य केवल यात्रियों को खाली सीट तलाशने में मदद करना नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म और कोच के भीतर भीड़ का संतुलन सुधारना है। आमतौर पर यात्री सीढ़ियों, एस्केलेटर या इंटरचेंज के सबसे नजदीक वाले डिब्बे में चढ़ने की कोशिश करते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ कोच जरूरत से ज्यादा भर जाते हैं और बाकी हिस्सों में जगह बनी रहती है। अब स्क्रीन पर जानकारी मिलने से लोग प्लेटफॉर्म के दूसरे हिस्से की ओर जा सकेंगे। हालांकि सुविधा का असर यात्रियों की आदत और स्क्रीन को समय पर देखने पर निर्भर करेगा। शुरुआती दौर में डीएमआरसी इसके इस्तेमाल और तकनीकी सटीकता पर नजर रखेगा। आगे चलकर सफल अनुभव के आधार पर ऐसी व्यवस्था अन्य मेट्रो कॉरिडोरों पर भी बढ़ाई जा सकती है।
पीक आवर में सफर आसान होने की उम्मीद
पिंक लाइन पर रोज सफर करने वालों के लिए यह बदलाव खासा अहम है। व्यस्त समय में ट्रेन आने से पहले कोच की स्थिति का अंदाजा लगने पर यात्री भीड़ वाले दरवाजों से बच सकते हैं। इससे चढ़ने-उतरने में लगने वाला समय घट सकता है और प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भागदौड़ भी कम हो सकती है। डीएमआरसी का कहना है कि यात्री स्क्रीन पर उपलब्ध संकेत देखकर कम भीड़ वाले कोच की ओर बढ़ें। फिर भी यात्रियों को सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा और ट्रेन के रुकने से पहले पीली पट्टी के पीछे रहना होगा। सेंसर आधारित आंकड़ा अनुमानित है, इसलिए इसे अंतिम या स्थायी स्थिति नहीं माना जा सकता। ट्रेन के दरवाजे खुलने तक यात्रियों की संख्या बदल सकती है। सुविधा का सही लाभ तभी मिलेगा, जब लोग इसे जल्दबाजी के बजाय समझदारी से इस्तेमाल करेंगे।
पिंक लाइन पर यह सुविधा लागू होने के बाद दिल्ली मेट्रो की डिजिटल यात्री सेवाओं का दायरा और बढ़ गया है। मैजेंटा लाइन के अनुभव से संकेत मिला कि यात्रा से पहले भीड़ की जानकारी देना यात्रियों के फैसले को बेहतर बना सकता है। अब पिंक लाइन पर इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, डीएमआरसी की प्राथमिकता यात्रियों को अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बोर्डिंग अनुभव देना है। यदि यात्रियों की प्रतिक्रिया संतोषजनक रहती है तो भविष्य में अधिक स्टेशनों और अन्य लाइनों पर भी कोच स्तर की जानकारी उपलब्ध कराने की संभावना बन सकती है। फिलहाल यात्रियों के लिए सीधा संदेश यही है कि ट्रेन आने से पहले स्क्रीन पर नजर डालें, कम भीड़ वाले कोच की ओर बढ़ें और सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए यात्रा करें।
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