साइबर ठगी की शिकायत कैसे करें: नोएडा में शेयर ट्रेडिंग, APK फाइल और टेलीग्राम ठगी के शिकार हों तो क्या करें
- Shiv Kumar
- 01 Nov, 2026
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। कभी सोशल मीडिया या टेलीग्राम ग्रुप में शेयर ट्रेडिंग से कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता है, तो कभी व्हाट्सऐप पर APK फाइल भेजकर मोबाइल में सेंध लगाने की कोशिश होती है। कई मामलों में ठग किसी परिचित, अधिकारी या कंपनी के बॉस की फोटो लगाकर अर्जेंट काम का बहाना बनाते हैं और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही बैंक खाते, यूपीआई और मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी को खतरे में डाल सकती है। अगर आपके साथ साइबर ठगी हो गई है, तो घबराकर ठग से बहस करने या उसके कहने पर दोबारा पैसे भेजने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। सबसे पहले 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और अपने बैंक या यूपीआई सेवा देने वाले ऐप को सूचना देकर संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोकने की कोशिश करें। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत जितनी जल्दी की जाएगी, पैसे के लेनदेन को ट्रेस करने और आगे ट्रांसफर होने से रोकने की कोशिश उतनी जल्दी शुरू हो सकती है। हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
नोएडा में साइबर ठगी के ताजा मामले: कैसे फंसते हैं लोग
नोएडा में साइबर ठगी के मामलों में शेयर ट्रेडिंग, फर्जी निवेश ऐप, APK फाइल और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ठग पहले लोगों से दोस्ती या भरोसे का रिश्ता बनाते हैं, फिर उन्हें निवेश के नाम पर बड़ी रकम जमा कराने के लिए कहते हैं। कई बार शुरुआत में छोटी रकम पर मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता जाता है। इसके बाद पीड़ित से लाखों रुपये जमा करा लिए जाते हैं और जब वह रकम निकालने की कोशिश करता है, तो टैक्स, फीस या अकाउंट अनलॉक करने के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं। अगस्त 2026 में नोएडा में IGL बिल के नाम पर APK फाइल भेजकर ठगी का मामला सामने आया था। सितंबर में शेयर ट्रेडिंग और फर्जी ऐप के जरिए भी लोगों को निशाना बनाए जाने की खबरें आईं। अक्टूबर में पांच लोगों से करीब 34 लाख रुपये की ठगी का मामला भी रिपोर्ट हुआ। इन घटनाओं से साफ है कि साइबर ठग एक ही तरीके तक सीमित नहीं हैं। वे लोगों की जरूरत, लालच, डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी अनजान लिंक, ऐप या निवेश योजना पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करना और ठगी होने पर तुरंत शिकायत करना जरूरी है।
टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और क्रिप्टो ट्रेडिंग का जाल
साइबर ठग व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर शेयर बाजार, आईपीओ, क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम से ग्रुप बनाते हैं। इनमें कुछ लोग खुद को एक्सपर्ट या सफल निवेशक बताते हैं और स्क्रीनशॉट के जरिए बड़े मुनाफे का दावा करते हैं। शुरुआत में छोटी रकम लगाने पर ऐप में लाभ दिखाया जाता है, ताकि निवेशक का भरोसा बढ़े। इसके बाद बड़ी रकम जमा कराई जाती है। जब पीड़ित पैसे निकालना चाहता है, तो उससे टैक्स, कमीशन या निकासी शुल्क के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगा जाता है। कई बार फर्जी ऐप में दिख रहा पूरा बैलेंस केवल स्क्रीन पर होता है। नोएडा में भी व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के मामले सामने आए हैं।
बॉस की फोटो लगाकर पैसे ट्रांसफर कराने की ठगी
इस तरह की ठगी में अपराधी किसी कंपनी के मालिक, वरिष्ठ अधिकारी या परिचित व्यक्ति की फोटो लगाकर दूसरे नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज भेजते हैं। वे खुद को बॉस बताकर अचानक और गोपनीय भुगतान करने को कहते हैं। संदेश में जल्दबाजी का दबाव बनाया जाता है और कहा जाता है कि फोन पर बात नहीं हो सकती। कुछ मामलों में ठग किसी अधिकारी का असली व्हाट्सऐप अकाउंट या वेब सेशन हैक करके भी कर्मचारियों को संदेश भेजते हैं। गृह मंत्रालय के I4C ने 2026 में ऐसे ‘बॉस स्कैम’ को लेकर चेतावनी जारी की थी। किसी परिचित की फोटो या नाम देखकर पैसे न भेजें। भुगतान से पहले उसके पुराने नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें और कंपनी की तय मंजूरी प्रक्रिया अपनाएं।
फिनटेक कंपनी के सर्वर हैक का मामला
सितंबर 2026 में नोएडा की फिनटेक कंपनी रेनोवा पे-टेक ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसका सर्वर हैक कर कंपनी के API पोर्टल के जरिए करीब 2.42 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। कंपनी की शिकायत के मुताबिक, 13 सितंबर को कुछ घंटों के भीतर 497 ट्रांजैक्शन के जरिए रकम 28 बैंकों के 58 खातों में भेजी गई। साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में बैंक खातों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की पड़ताल की जा रही थी। यह मामला बताता है कि साइबर अपराध केवल आम लोगों के मोबाइल या बैंक खाते तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल भुगतान से जुड़ी कंपनियां भी हैकिंग और अनधिकृत ट्रांजैक्शन का निशाना बन सकती हैं।
ठगी होते ही पहले 1 घंटे में क्या करें (गोल्डन ऑवर)
अगर आपके खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकल गए हैं, तो शुरुआती समय बेहद अहम है। सबसे पहले ठग से बातचीत बंद करें और उसे कोई अतिरिक्त रकम न भेजें। तुरंत 1930 पर कॉल करके वित्तीय साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराएं। इसके साथ ही अपने बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर, मोबाइल ऐप या शाखा के जरिए संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी दें। बैंक से कार्ड, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग को जरूरत के मुताबिक ब्लॉक कराने और रकम को रोकने की प्रक्रिया शुरू करने को कहें। ट्रांजैक्शन आईडी, समय और राशि नोट कर लें। मोबाइल में संदिग्ध APK डाउनलोड की है तो उसे नेटवर्क से अलग करें और दूसरे सुरक्षित डिवाइस से बैंकिंग पासवर्ड बदलें। शिकायत में देरी न करें।
1930 हेल्पलाइन पर कॉल
वित्तीय साइबर ठगी की तुरंत शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 उपलब्ध है। यह सेवा 24 घंटे चालू रहती है। कॉल करते समय अपना मोबाइल नंबर, बैंक या वॉलेट का नाम, खाते या यूपीआई की जानकारी, ट्रांजैक्शन आईडी, तारीख और ठगी की रकम तैयार रखें। ऑपरेटर को बताएं कि पैसा किस खाते से निकला और किस यूपीआई आईडी या बैंक खाते में भेजा गया। शिकायत दर्ज होने पर मिलने वाला लॉगिन या शिकायत नंबर सुरक्षित रखें। हेल्पलाइन पर सूचना देने के बाद पोर्टल पर शिकायत की प्रक्रिया भी पूरी करें। जल्दी सूचना मिलने से संबंधित बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता तक रकम रोकने का अनुरोध पहुंचाने में मदद मिल सकती है, लेकिन पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
बैंक/यूपीआई ऐप पर तुरंत सूचना और खाता फ्रीज कराना
1930 पर शिकायत के साथ ही अपने बैंक को तुरंत सूचना देना जरूरी है। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, कार्ड के पीछे लिखे नंबर या बैंक ऐप में दिए गए हेल्प सेक्शन से संपर्क करें। बैंक को ट्रांजैक्शन आईडी, समय, रकम और प्राप्तकर्ता की यूपीआई आईडी या खाते की जानकारी दें। संदिग्ध भुगतान को रोकने, खाते पर अस्थायी रोक लगाने, यूपीआई सेवा बंद करने या कार्ड ब्लॉक करने का अनुरोध करें। अगर यूपीआई ऐप से भुगतान हुआ है, तो उसी ऐप में ट्रांजैक्शन के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करें। बैंक से शिकायत का रेफरेंस नंबर जरूर लें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें और बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले को OTP, PIN या पासवर्ड न बताएं।
cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें
ऑनलाइन शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाएं। वहां ‘Register a Complaint’ या शिकायत दर्ज करने का विकल्प चुनें और उपलब्ध निर्देश पढ़कर आगे बढ़ें। वित्तीय धोखाधड़ी के लिए ‘अन्य साइबर अपराध की रिपोर्ट करें’ के तहत संबंधित वित्तीय साइबर फ्रॉड विकल्प चुनें। मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP से लॉगिन करें। इसके बाद घटना की तारीख, समय, स्थान, ठगी की रकम और पूरा घटनाक्रम लिखें। बैंक, वॉलेट या मर्चेंट का नाम और 12 अंकों का ट्रांजैक्शन आईडी/UTR नंबर जैसी जानकारी भरें। मांगे गए दस्तावेज और स्क्रीनशॉट अपलोड करके फॉर्म जमा करें। शिकायत का पावती संख्या संभालकर रखें। इसी नंबर से आगे शिकायत की स्थिति देखी जा सकती है।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
शिकायत दर्ज करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल खोलें और ‘अन्य साइबर अपराध की रिपोर्ट करें’ का विकल्प चुनें। इसके बाद मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन कर OTP दर्ज करें। लॉगिन के बाद वित्तीय धोखाधड़ी की श्रेणी चुनें और घटना से जुड़ी जानकारी भरें। इसमें ठगी की तारीख, समय, स्थान, रकम, बैंक का नाम और ट्रांजैक्शन आईडी शामिल करें। घटना का विवरण साफ शब्दों में लिखें और उपलब्ध स्क्रीनशॉट, बैंक स्टेटमेंट तथा चैट रिकॉर्ड अपलोड करें। फॉर्म में दी गई जानकारी एक बार जांचने के बाद सबमिट करें। शिकायत जमा होने पर मिलने वाला पावती संख्या सुरक्षित रखें। पोर्टल पर ‘Track Your Complaint’ या शिकायत की स्थिति देखने के विकल्प से अपडेट लिया जा सकता है।
जरूरी सबूत: स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी, चैट
साइबर ठगी की शिकायत में डिजिटल सबूत बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जिस नंबर से कॉल या मैसेज आया, उसका स्क्रीनशॉट लें। व्हाट्सऐप या टेलीग्राम चैट, ठग की प्रोफाइल, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, वेबसाइट और ऐप का नाम सुरक्षित रखें। बैंक से मिले डेबिट मैसेज, खाते का स्टेटमेंट, यूपीआई ट्रांजैक्शन की रसीद और 12 अंकों का UTR नंबर भी संभालकर रखें। अगर APK फाइल या कोई लिंक भेजा गया था, तो उसका नाम और उपलब्ध URL नोट करें, लेकिन उसे दोबारा खोलने या किसी दूसरे व्यक्ति को भेजने से बचें। चैट डिलीट न करें और फोन को तुरंत फॉर्मेट न करें। सभी सबूतों की कॉपी सुरक्षित रखें, ताकि पुलिस और बैंक को जांच में मदद मिल सके।
नोएडा साइबर क्राइम थाने में FIR कैसे कराएं
ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बाद जरूरत पड़ने पर नोएडा के साइबर क्राइम पुलिस थाने में भी संपर्क किया जा सकता है। अपने साथ पहचान पत्र, बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन रसीद, 1930 की शिकायत संख्या और पोर्टल से मिला पावती संख्या रखें। पुलिस को घटनाक्रम क्रमवार बताएं और उपलब्ध डिजिटल सबूत दें। शिकायत के आधार पर पुलिस जांच कर सकती है और मामले के तथ्यों के अनुसार एफआईआर दर्ज की जा सकती है। केवल ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में एफआईआर अपने आप दर्ज हो जाएगी। शिकायत की प्रति या एफआईआर नंबर जरूर लें। अगर घटना किसी दूसरे जिले या राज्य से जुड़ी हो, तब भी राष्ट्रीय पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है; संबंधित पुलिस एजेंसी आगे कार्रवाई करती है।
सेक्टर-36 साइबर थाना और संपर्क
गौतमबुद्ध नगर का साइबर क्राइम पुलिस थाना नोएडा के सेक्टर-36 में बी-ब्लॉक, सर्विस रोड पर स्थित है। यहां साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की शिकायत और जांच संबंधी कार्रवाई के लिए संपर्क किया जा सकता है। थाने जाने से पहले अपने दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की कॉपी तैयार रखें। 1930 पर की गई शिकायत और cybercrime.gov.in से मिला पावती संख्या भी साथ रखें। थाने का सीधा फोन नंबर और वर्तमान जनसंपर्क समय आधिकारिक पुलिस स्रोत से स्पष्ट रूप से सत्यापित नहीं हो सका है, इसलिए किसी अनौपचारिक वेबसाइट पर दिए नंबर पर भरोसा करने के बजाय यूपी पुलिस या गौतमबुद्ध नगर पुलिस के आधिकारिक माध्यम से जानकारी लें। आपात स्थिति में 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
ठगी के पैसे वापस मिलने की संभावना और प्रक्रिया
साइबर ठगी के बाद पैसे वापस मिलने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि शिकायत कितनी जल्दी की गई, रकम आगे किन खातों में भेजी गई और पुलिस व बैंक उसे रोकने में कितनी जल्दी कार्रवाई कर पाए। 1930 पर सूचना मिलने के बाद संबंधित बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता को संदिग्ध रकम पर रोक या lien लगाने का अनुरोध भेजा जा सकता है। अगर रकम समय रहते किसी खाते में रोकी जाती है, तो जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे पीड़ित को लौटाने की कार्रवाई संभव है। लेकिन पैसा कई खातों से होकर आगे निकल गया हो तो रिकवरी कठिन हो सकती है। किसी एजेंट को रकम वापस दिलाने के नाम पर फीस न दें। पुलिस, बैंक और अधिकृत प्रक्रिया के जरिए ही आगे बढ़ें।
ठगी से बचने के 10 जरूरी नियम
ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए कुछ आदतें अपनाना जरूरी है। पहला, अनजान लिंक पर क्लिक न करें। दूसरा, व्हाट्सऐप या ईमेल से आई APK फाइल डाउनलोड न करें। तीसरा, OTP, UPI PIN और पासवर्ड किसी को न बताएं। चौथा, निवेश से पहले कंपनी और ऐप की जांच करें। पांचवां, तय मुनाफे या बिना जोखिम के बड़े रिटर्न के दावे पर भरोसा न करें। छठा, बॉस या परिचित के नाम से आए पैसे के अनुरोध की दूसरे नंबर पर पुष्टि करें। सातवां, स्क्रीन शेयरिंग ऐप से बचें। आठवां, बैंकिंग ऐप और मोबाइल अपडेट रखें। नौवां, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखें। दसवां, ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट की पहचान
फर्जी ट्रेडिंग ऐप अक्सर सोशल मीडिया ग्रुप, अनजान लिंक या निजी मैसेज के जरिए डाउनलोड करने को दिए जाते हैं। इनमें असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफे का दावा, बिना जोखिम निवेश और तुरंत पैसा लगाने का दबाव जैसे संकेत मिल सकते हैं। कुछ ऐप में खाते का बैलेंस और मुनाफा दिखता है, लेकिन निकासी के समय टैक्स या फीस मांगी जाती है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसका नाम आधिकारिक ऐप स्टोर और संबंधित स्टॉक एक्सचेंज की सूची में जांचें। वेबसाइट का पता ध्यान से देखें; मिलते-जुलते नाम या गलत स्पेलिंग वाली साइट फर्जी हो सकती है। किसी अनजान व्यक्ति के भेजे APK को इंस्टॉल न करें। निवेश के लिए केवल सत्यापित ब्रोकर और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।
SEBI/RBI पंजीकरण कैसे जांचें
शेयर बाजार में निवेश से पहले ब्रोकर, निवेश सलाहकार या अन्य मार्केट इंटरमीडियरी का पंजीकरण SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जांचें। SEBI के निवेशक सहायता पेज पर ‘मार्केट इंटरमीडियरी की पंजीकरण स्थिति जांचें’ का विकल्प दिया गया है। वहां संस्था का नाम और उपलब्ध पंजीकरण विवरण मिलान करें। ट्रेडिंग ऐप के लिए संबंधित स्टॉक एक्सचेंज की अधिकृत मोबाइल ऐप सूची भी देखें। वहीं, बैंक या NBFC के नाम पर कर्ज और जमा योजना का प्रस्ताव मिले तो RBI की वेबसाइट पर पंजीकरण और जमा स्वीकार करने की अनुमति जांचें। ध्यान रखें, केवल RBI में NBFC का पंजीकृत होना हर तरह की जमा योजना की अनुमति नहीं है। कंपनी के नाम, वेबसाइट और प्रमाणपत्र का मिलान करें।
शेयर ट्रेडिंग, टेलीग्राम और APK फाइल से जुड़े मामले
ऊपर दिए गए मामलों से पता चलता है कि ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। एक मामले में निवेश का लालच दिया जाता है, तो दूसरे में मोबाइल में सेंध लगाने की कोशिश होती है। इसलिए किसी भी अनजान ऐप या लिंक को सुरक्षित मानकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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