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पर्थला चौक पर जाम से राहत दिलाने के लिए बनेगा 710 मीटर लंबा अंडरपास, नोएडा में परियोजना पर खर्च होंगे 80 करोड़ रुपये

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नोएडा के पर्थला चौक पर जाम से राहत दिलाने के लिए प्राधिकरण 80 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन का अंडरपास बनाएगा। इसकी लंबाई 710 मीटर होगी। डीपीआर आईआईटी रुड़की भेजी गई है। निर्माण 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।

नोएडा के पर्थला चौक पर रोजाना लगने वाले जाम से वाहन चालकों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। नोएडा प्राधिकरण ने यहां करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन का अंडरपास बनाने की योजना तैयार की है। प्रस्तावित अंडरपास की लंबाई 710 मीटर होगी और इसमें दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन बनाई जाएंगी। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तकनीकी मंजूरी के लिए आईआईटी रुड़की भेजी गई है। करीब एक सप्ताह में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद जताई गई है। इसके बाद प्राधिकरण निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। अंडरपास का निर्माण 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बनने से एफएनजी कॉरिडोर और विकास मार्ग के बीच वाहनों की आवाजाही आसान होगी। सेक्टर-66, 71, 121, 122, किसान चौक और छिजारसी समेत आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इसका फायदा मिलेगा। प्राधिकरण का उद्देश्य पर्थला चौक पर यातायात का दबाव कम करना और लोगों का सफर आसान बनाना है।


710 मीटर लंबा होगा अंडरपास, दोनों तरफ बनेंगी तीन-तीन लेन

नोएडा प्राधिकरण की योजना के मुताबिक, पर्थला चौक पर प्रस्तावित अंडरपास को छह लेन का बनाया जाएगा। इसकी कुल लंबाई करीब 710 मीटर होगी। इसमें आने और जाने वाले वाहनों के लिए तीन-तीन लेन की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा दोनों ओर 280-280 मीटर लंबे पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे, ताकि वाहन आसानी से अंडरपास में प्रवेश कर सकें और बाहर निकल सकें। परियोजना की डीपीआर आईआईटी रुड़की को तकनीकी मंजूरी के लिए भेजी गई है। करीब एक सप्ताह में इसकी रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद प्राधिकरण निर्माण के लिए टेंडर जारी करेगा। अंडरपास बनने से चौक पर वाहनों के रुकने की जरूरत कम होगी और यातायात को सुचारु रखने में मदद मिलेगी।


80 करोड़ रुपये होंगे खर्च, 18 महीने में निर्माण का लक्ष्य

पर्थला चौक पर बनने वाले अंडरपास की अनुमानित लागत करीब 80 करोड़ रुपये रखी गई है। नोएडा प्राधिकरण ने निर्माण कार्य को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। परियोजना में डायफ्राम वॉल और आरसीसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इन तकनीकों का उपयोग अंडरपास की संरचना को मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही बारिश के दौरान अंडरपास में पानी जमा न हो, इसके लिए पंपिंग सिस्टम लगाने की योजना है। यह व्यवस्था बरसात में जलभराव की समस्या को कम करने में मदद करेगी। फिलहाल परियोजना तकनीकी मंजूरी के चरण में है। आईआईटी रुड़की से रिपोर्ट मिलने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा। हालांकि, निर्माण शुरू होने की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।


एफएनजी कॉरिडोर और विकास मार्ग पर कम होगा यातायात का दबाव

पर्थला चौक नोएडा के प्रमुख यातायात जंक्शनों में शामिल है। यहां एफएनजी कॉरिडोर और विकास मार्ग से आने वाले वाहनों का दबाव रहता है। इस रास्ते से गाजियाबाद, एनएच-9, मेरठ एक्सप्रेसवे, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की ओर बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। खासकर सुबह और शाम कार्यालय आने-जाने के समय चौक पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इससे वाहन चालकों को जाम में फंसना पड़ता है और सफर में अधिक समय लगता है। प्रस्तावित अंडरपास बनने से वाहनों को चौक पर बार-बार रुकने की जरूरत कम होगी। इससे यातायात का दबाव घटने और वाहनों की आवाजाही तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक राहत निर्माण पूरा होने और यातायात व्यवस्था शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


सेक्टर-66, 71, 121, 122 और किसान चौक के लोगों को मिलेगा फायदा

पर्थला चौक पर अंडरपास बनने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इनमें सेक्टर-66, सेक्टर-71, सेक्टर-121, सेक्टर-122, किसान चौक और छिजारसी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन क्षेत्रों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार और अन्य कामों के लिए आवाजाही करते हैं। पर्थला चौक पर लगने वाले जाम के कारण उन्हें अक्सर अतिरिक्त समय खर्च करना पड़ता है। अंडरपास बनने से वाहनों को चौक पार करने में कम समय लग सकता है। इसका फायदा गाजियाबाद और मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले यात्रियों को भी मिलेगा। फिलहाल नोएडा प्राधिकरण को आईआईटी रुड़की की तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और इसके आधार पर निर्माण की अगली कार्रवाई होगी।

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