नोएडा में स्मॉग के कारण बिगड़ी हवा की गुणवत्ता, सेक्टर-62 में AQI 427, प्रदूषण रोकने के लिए ग्रैप-2 की पाबंदियां लागू

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नोएडा में बुधवार सुबह प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ गया। शहर का औसत एक्यूआई 316 और सेक्टर-62 में 427 दर्ज हुआ। ग्रेप-2 की पाबंदियों के बावजूद हवा खराब बनी हुई है। दिल्ली बॉर्डर पर वाहनों की जांच से जाम और लोगों की परेशानी बढ़ रही है।

नोएडा में वायु प्रदूषण लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। बुधवार सुबह से ही शहर और आसपास के इलाकों में स्मॉग की मोटी चादर छाई रही। सुबह नौ बजे नोएडा का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 316 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। सबसे चिंताजनक स्थिति सेक्टर-62 में रही, जहां एक्यूआई 427 तक पहुंच गया। यह प्रदूषण का गंभीर स्तर है, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। खराब हवा के कारण आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ने की आशंका है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप)-2 की पाबंदियां लागू होने के बावजूद हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। शहर के कई सेक्टरों में एक्यूआई 300 के पार दर्ज किया गया है। वहीं, दिल्ली में वाहनों के प्रवेश से जुड़ी पाबंदियों और जांच के कारण नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर यातायात का दबाव भी बढ़ गया है। सेक्टर-62 और चिल्ला बॉर्डर पर वाहनों की लंबी कतारें लगने से लोगों को जाम का सामना करना पड़ रहा है।


सेक्टर-62 में सबसे ज्यादा प्रदूषण, एक्यूआई 427 तक पहुंचा

नोएडा के अलग-अलग इलाकों में बुधवार सुबह हवा की गुणवत्ता खराब दर्ज की गई। सबसे अधिक प्रदूषण सेक्टर-62 में रहा, जहां एक्यूआई 427 तक पहुंच गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। वहीं, सेक्टर-150 में एक्यूआई 351 और सेक्टर-110 में 350 दर्ज किया गया। सेक्टर-39 में एक्यूआई 317 रहा, जबकि सेक्टर-1 में यह 251 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। एक्यूआई 301 से 400 के बीच होने पर हवा की गुणवत्ता बहुत खराब मानी जाती है, जबकि 401 से 500 के बीच का स्तर गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने से खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों को अधिक दिक्कत हो सकती है। सेक्टर-62 में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंचना विशेष चिंता का विषय बना हुआ है।


ग्रेप-2 की पाबंदियों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू हैं। इसके बावजूद नोएडा में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब बनी हुई है। बुधवार सुबह शहर का औसत एक्यूआई 316 दर्ज किया गया। पिछले चार दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदूषण के स्तर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। एक नवंबर को नोएडा का एक्यूआई 248 था, जो दो नवंबर को बढ़कर 330 पहुंच गया। इसके बाद तीन नवंबर को कुछ सुधार हुआ और एक्यूआई 291 दर्ज किया गया। हालांकि, चार नवंबर को यह फिर बढ़कर 316 हो गया। इस दौरान शहर में स्मॉग की स्थिति भी बनी हुई है। मौसम की परिस्थितियां प्रतिकूल रहने पर प्रदूषण और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू पाबंदियों के साथ स्थानीय स्तर पर नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण हो गया है।


दिल्ली बॉर्डर पर वाहनों की जांच से बढ़ा जाम

वायु प्रदूषण के बीच नोएडा से दिल्ली आने-जाने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। दिल्ली में बीएस-4 श्रेणी के कुछ वाहनों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंधों के कारण सीमावर्ती इलाकों में वाहनों की जांच की जा रही है। इसका असर नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। सेक्टर-62 और चिल्ला बॉर्डर पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। दिल्ली में प्रवेश से पहले जांच के कारण वाहन चालकों को जाम का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने और धीमी गति से चलने से स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन बढ़ने की आशंका भी रहती है। पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे शहर में यातायात का दबाव लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है। हालांकि, प्रतिबंध किन वाहन श्रेणियों पर लागू हैं, इसकी पुष्टि संबंधित यातायात और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के आदेश से करना जरूरी है।


खराब हवा से सेहत पर खतरा, लोगों को सावधानी बरतने की सलाह

नोएडा में लगातार खराब हो रही हवा का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विशेष रूप से सेक्टर-62 जैसे इलाकों में, जहां एक्यूआई गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है, लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक दिक्कत होने की आशंका रहती है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर रहने और खुले में भारी शारीरिक गतिविधियां करने से बचने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। बाहर निकलना जरूरी होने पर अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क उपयोगी हो सकता है। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

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