नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू, जानें जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के रास्ते और परिवहन सुविधाएं
- Shiv Kumar
- 06 Nov, 2026
ग्रेटर नोएडा और गौतमबुद्ध नगर के जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब यात्रियों के लिए हवाई सफर का नया विकल्प बन चुका है। लंबे इंतजार के बाद 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया था। इसके बाद 15 जून 2026 से यहां व्यावसायिक उड़ानों का संचालन शुरू हुआ। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए यह एयरपोर्ट काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मथुरा, आगरा, अलीगढ़ और आसपास के इलाकों के यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे, सड़क मार्ग, सरकारी बसों और शटल सेवाओं के विकल्प उपलब्ध हैं। वहीं, मेट्रो और नमो भारत ट्रेन से जोड़ने की योजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। एयरपोर्ट के पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल बनाया गया है। इसकी सालाना क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की है। आने वाले समय में एयरपोर्ट का विस्तार होने के साथ उड़ानों, यात्रियों और परिवहन सुविधाओं में बढ़ोतरी की उम्मीद है। आइए जानते हैं जेवर एयरपोर्ट की मौजूदा स्थिति, यहां तक पहुंचने के रास्ते और आसपास के इलाकों पर इसके असर के बारे में।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पूरी जानकारी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित है। इसे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, यानी इसे पहले से मौजूद किसी हवाई अड्डे का विस्तार करने के बजाय नई जगह पर बनाया गया है। इसका विकास और संचालन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मे है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल की सहायक कंपनी है। एयरपोर्ट का आईएटीए कोड DXN है। इसका उद्देश्य दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव कम करने के साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध कराना है। यहां यात्रियों के साथ कार्गो सेवाओं के विकास की भी योजना है।
एयरपोर्ट का पहला चरण
जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल तैयार किया गया है। इस चरण की सालाना यात्री क्षमता करीब 1.2 करोड़ है। एयरपोर्ट को इस तरह विकसित किया गया है कि भविष्य में यात्रियों और उड़ानों की संख्या बढ़ने पर इसका विस्तार किया जा सके। मास्टर प्लान के अनुसार, आगे के चरण पूरे होने पर इसकी सालाना क्षमता सात करोड़ से अधिक यात्रियों तक पहुंच सकती है। एयरपोर्ट में यात्रियों की आवाजाही, सुरक्षा जांच, सामान की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। पहले चरण का उद्देश्य नियमित हवाई सेवाओं की शुरुआत करना और धीरे-धीरे अधिक शहरों तथा एयरलाइंस को इससे जोड़ना है।
निर्माण की मौजूदा स्थिति
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का निर्माण पूरा होने और जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद यहां व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत हो चुकी है। इसका मतलब है कि एयरपोर्ट अब केवल निर्माणाधीन परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि यात्रियों के लिए परिचालन में आ चुका है। हालांकि, पूरे एयरपोर्ट का विकास अभी समाप्त नहीं हुआ है। भविष्य की जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त बुनियादी ढांचा और क्षमता बढ़ाने की योजनाएं आगे बढ़ेंगी। एयरपोर्ट के आसपास सड़क संपर्क, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाना भी महत्वपूर्ण है। यात्रियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि एयरपोर्ट चालू होने के बावजूद सभी प्रस्तावित रेल और मेट्रो कनेक्शन अभी उपलब्ध नहीं हैं।
उद्घाटन और शुरुआत की तारीख
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। हालांकि, उद्घाटन के तुरंत बाद नियमित यात्री उड़ानें शुरू नहीं हुई थीं। सुरक्षा और संचालन से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद एयरपोर्ट प्रबंधन ने 15 जून 2026 से व्यावसायिक उड़ानें शुरू करने की घोषणा की थी। इसी तारीख से नियमित यात्री सेवाओं की शुरुआत हुई। शुरुआती उड़ानों में इंडिगो की महत्वपूर्ण भूमिका रही और लखनऊ से जेवर के बीच पहली व्यावसायिक उड़ान भी संचालित हुई। इसलिए एयरपोर्ट के उद्घाटन और नियमित उड़ानें शुरू होने की तारीख अलग-अलग हैं। अब यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए एयरलाइन की मौजूदा उड़ान सूची और समय की जांच करनी चाहिए।
एयरपोर्ट तक कैसे पहुंचें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने के लिए यात्री अपनी कार, टैक्सी, सरकारी बस या उपलब्ध शटल सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा से आने वालों के लिए यमुना एक्सप्रेसवे की दिशा में सड़क मार्ग प्रमुख विकल्प है। एयरपोर्ट की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा और अलीगढ़ जैसे शहरों को शामिल किया गया है। दिल्ली के प्रमुख बस टर्मिनलों से भी परिवहन विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। एयरपोर्ट टर्मिनल और निर्धारित बस स्टॉप के बीच निःशुल्क शटल सुविधा भी दी जाती है। यात्रा से पहले बस का समय, बोर्डिंग पॉइंट और अंतिम स्टॉप जरूर जांचें, ताकि फ्लाइट पकड़ने में परेशानी न हो।
सड़क मार्ग से कनेक्टिविटी
जेवर एयरपोर्ट की सड़क कनेक्टिविटी में यमुना एक्सप्रेसवे की अहम भूमिका है। ग्रेटर नोएडा से यमुना एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले यात्री एयरपोर्ट के निर्धारित संपर्क मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। आगरा और मथुरा की तरफ से आने वालों के लिए भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके अलावा सरकारी परिवहन की व्यवस्था में नोएडा सेक्टर-37, बॉटनिकल गार्डन, परी चौक, गाजियाबाद, मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों को जोड़ने वाले मार्ग शामिल हैं। दिल्ली से आने वाले यात्री अपनी शुरुआत की जगह और ट्रैफिक के अनुसार सड़क मार्ग चुन सकते हैं। एयरपोर्ट जाते समय केवल अनुमानित दूरी नहीं, बल्कि उस समय की यातायात स्थिति भी देखनी चाहिए।
मेट्रो और रेल कनेक्शन की योजना
जेवर एयरपोर्ट को भविष्य में मेट्रो और नमो भारत जैसी रेल आधारित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की योजना है। गाजियाबाद से जेवर तक लगभग 72.44 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर पर नमो भारत और मेट्रो सेवाओं की व्यवस्था का प्रस्ताव सामने आया है। योजना में 11 नमो भारत स्टेशन और 18 मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। यह कॉरिडोर गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह परियोजना अभी प्रस्ताव और डीपीआर से जुड़ी प्रक्रियाओं के चरण में है। यात्रियों को इसे चालू रेल सेवा नहीं समझना चाहिए। फिलहाल एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए सड़क परिवहन ही प्रमुख विकल्प है।
फ्लाइट्स और एयरलाइंस
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 जून 2026 को व्यावसायिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत हुई थी। इंडिगो शुरुआती संचालन से जुड़ी प्रमुख एयरलाइन रही है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने आकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस के भी सेवाओं से जुड़ने की योजना की जानकारी दी थी। एयरपोर्ट का उद्देश्य धीरे-धीरे देश के प्रमुख शहरों के साथ हवाई संपर्क बढ़ाना है। हालांकि, किसी एयरलाइन के नाम की घोषणा होने का मतलब यह नहीं है कि उसकी हर प्रस्तावित उड़ान अभी उपलब्ध है। यात्रियों को टिकट बुक करने से पहले संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर DXN एयरपोर्ट कोड डालकर उपलब्ध रूट, किराया, तारीख और उड़ान का समय जांचना चाहिए।
जेवर एयरपोर्ट का नोएडा रियल एस्टेट पर असर
जेवर एयरपोर्ट का असर केवल हवाई यात्रा तक सीमित नहीं है। इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास के इलाकों में आवासीय तथा व्यावसायिक विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं। बेहतर एयर कनेक्टिविटी के कारण होटल, लॉजिस्टिक्स, कार्यालय, गोदाम और अन्य कारोबारों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। खासकर यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़े सेक्टरों में जमीन और संपत्ति को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, एयरपोर्ट के कारण हर प्लॉट या फ्लैट की कीमत बढ़ना तय नहीं है। संपत्ति खरीदने से पहले परियोजना की कानूनी मंजूरी, रेरा पंजीकरण, जमीन का उपयोग, सड़क संपर्क और वास्तविक विकास की स्थिति जांचना जरूरी है।
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