दिल्ली की तरह बनेगा नगर निगम! सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण भंग करने के लिए दिए निर्देश
- Shiv Kumar
- 14 Aug, 2025
NEW DELHI: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण भंग कर उत्तर प्रदेश सरकार को मेट्रोपॉलिटन काउंसिल बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है। जिससे कामकाज में पारदर्शिता लाने और जनता की भागीदारी सुनिश्चित हो। यह फैसला कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर आया है, जिसमें नोएडा प्राधिकरण के कामकाज में भ्रष्टाचार, मनमानी और पारदर्शिता की कमी जैसी गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। करीब 50 साल पुराने इस प्राधिकरण पर कोर्ट ने बुधवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि यहां का प्रशासन कुछ गिने-चुने अधिकारियों के हाथों में केंद्रित है, जिससे जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।
अधिकारियों ने जमीन मालिकों को दिया अधिक मुआवजा
एसआईटी की रिपोर्ट में पाया गया कि प्राधिकरण की जमीन आवंटन नीतियां बिल्डरों के पक्ष में हैं और निष्पक्षता की कमी है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि बीस मामलों में प्राधिकरण के अधिकारियों ने जमीन मालिकों को जरूरत से अधिक मुआवजा दिया, जिसमें कथित मिलीभगत के संकेत हैं। इसके अलावा, जनता की राय लेने की कोई व्यवस्था नहीं है और कई परियोजनाओं को पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) के बिना मंजूरी दी जा रही है। निवासियों की शिकायतों का निस्तारण भी देरी से और अपर्याप्त तरीके से किया जाता है।
सिटिजन एडवाइजरी बोर्ड बनाने का आदेश
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को चार हफ्तों के भीतर नोएडा के लिए एक सिटिजन एडवाइजरी बोर्ड बनाने का आदेश दिया है, जो स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनेगा और उनके समाधान के लिए कदम उठाएगा। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना ईआईए और सुप्रीम कोर्ट की ग्रीन बेंच की अनुमति के नोएडा में कोई नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं होगा। वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि जब तक मंत्रिपरिषद कोई अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक एक मुख्य सतर्कता अधिकारी की नियुक्ति की जाए। यह अधिकारी या तो आईपीएस सेवा से होगा या फिर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से प्रतिनियुक्ति पर आएगा और नोएडा प्राधिकरण के वित्तीय लेन-देन की गहन जांच करेगा। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मुख्य सचिव से कहा है कि एसआईटी की सिफारिशों को कैबिनेट के सामने रखा जाए और उस पर उचित फैसला लिया जाए। अगर ऐसा होता है तो नोएडा का प्रशासनिक ढांचा दिल्ली की तरह नगर निगम मॉडल में बदल सकता है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






