बाइक चोरी कर सस्ते दामों में बेचते, फिर मौज मस्ती में पैसे उड़ाते, पुलिस ने 6 को दबोचा

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नोएडा थाना सेक्टर-63 पुलिस ने छह वाहन चोरों को गिरफ्तार कर 14 बाइक और एक ऑटो बरामद किया है। आरोपी चोरी की बाइकों से मोबाइल स्नैचिंग करते थे और सस्ते दामों पर वाहन व पार्ट्स बेचकर मौज-मस्ती करते थे।

नोएडा के थाना सेक्टर-63 पुलिस ने वाहन चोरी और मोबाइल स्नैचिंग की वारदातों में शामिल छह शातिर युवकों को गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 14 चोरी की बाइक और एक ऑटो बरामद किया है। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी मौज-मस्ती और खर्च निकालने के लिए वाहन चोरी करते थे और राह चलते लोगों को सस्ते दामों पर बाइक या उनके पार्ट्स बेच देते थे। डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि सभी आरोपी 19 से 22 साल की उम्र के हैं और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय थे।


19 से 22 साल के युवकों ने बनाया था चोरी का गैंग
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजू सक्सेना उर्फ टीटू (22), विपिन (21), अभिषेक (19), पवन (21), सुन्दरम (19) और समीर अंसारी (22) के रूप में हुई है। इनमें से चार आरोपी अनपढ़ हैं, जबकि दो 10वीं और 12वीं पास बताए गए हैं। सभी ने मिलकर एक संगठित गैंग बनाया था, जो नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी खासतौर पर रिहायशी इलाकों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों की पार्किंग में खड़ी बाइक को निशाना बनाते थे। चोरी के बाद इन वाहनों को तुरंत बेचने के बजाय छिपाकर रखा जाता था, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।


पार्किंग, रोड साइड और ग्रीन बेल्ट में छिपाते थे चोरी की बाइक
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बाइक चोरी करने के बाद वे उन्हें अलग-अलग जगहों पर पार्किंग, सड़क किनारे या ग्रीन बेल्ट में खड़ी कर देते थे। इससे पुलिस को एक साथ बरामदगी न हो सके और गैंग पकड़ा न जाए। जरूरत पड़ने पर वे इन्हीं बाइकों को बदल-बदल कर इस्तेमाल करते थे। आरोपी चोरी की गई कुछ बाइकों को सीधे राह चलते लोगों को सस्ते दामों पर बेच देते थे, जबकि कई मामलों में बाइक के पार्ट्स अलग-अलग कर दिए जाते थे। पुलिस के अनुसार, इस तरीके से वे जल्दी पैसा कमा लेते थे और किसी खास जगह से लिंक भी नहीं जुड़ पाता था।


चोरी की बाइक से करते थे मोबाइल स्नैचिंग
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी केवल वाहन चोरी तक सीमित नहीं थे, बल्कि चोरी की गई बाइकों का इस्तेमाल मोबाइल स्नैचिंग के लिए भी किया जा रहा था। भीड़भाड़ वाले इलाकों में तेज रफ्तार बाइक से झपट्टा मारकर मोबाइल छीनना इनके लिए आसान हो जाता था। स्नेचिंग और बाइक बिक्री से मिलने वाले पैसे से आरोपी मौज-मस्ती करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन आरोपियों ने अब तक कितनी वारदातों को अंजाम दिया है और क्या इनके तार किसी बड़े वाहन चोरी गिरोह से जुड़े हैं। बरामद वाहनों की पहचान कर उन्हें उनके असली मालिकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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