भूमि अधिग्रहण मुआवजे में गड़बड़ी का मामला, SIT ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट, जांच पूरी करने के लिए मांगे दो महीने
- Shiv Kumar
- 03 Apr, 2026
नोएडा प्राधिकरण में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया गया है। मामले की जांच अभी जारी है और इसे पूरा करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में है और रिपोर्ट सामने आने के बाद एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि रिपोर्ट में कुछ मामलों में तय मानकों से ज्यादा मुआवजा देने की बात सामने आई है।
12 अधिकारियों से पूछताछ, एक की हो चुकी मौत
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि जांच के दायरे में आए नोएडा प्राधिकरण के 12 पूर्व अधिकारियों में से एक की मृत्यु हो चुकी है, जबकि बाकी 11 अधिकारियों से एसआईटी ने पूछताछ की है। यह पूरी प्रक्रिया करीब तीन सप्ताह तक चली, जिसमें अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया था, ताकि मुआवजा वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता की सच्चाई सामने आ सके। अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी जांच में गहराई से पड़ताल की गई है।
1198 मामलों की जांच, 20 में ज्यादा मुआवजा
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार कुल 1,198 मामलों की जांच की गई, जिनमें से 1,167 मामलों में मुआवजा अदालत के आदेश के अनुसार दिया गया था। हालांकि, 20 मामलों में तय मानकों से अधिक भुगतान किया गया, जिससे गड़बड़ी की आशंका मजबूत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए चार प्रमुख बिंदु तय किए थे, जिनमें यह देखना शामिल था कि क्या जमीन मालिकों को जरूरत से ज्यादा मुआवजा मिला, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या इसमें किसी तरह की मिलीभगत थी। साथ ही प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की भी जांच की गई।
जारी, दो महीने का और समय मांगा
यह मामला काफी समय से कोर्ट में चल रहा है और इससे पहले भी इसकी जांच एसआईटी से कराई जा चुकी है। अब दोबारा जांच के आदेश के बाद एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंप दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा गया है। फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है और इसे अंतिम रूप देने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया है। माना जा रहा है कि आगे की सुनवाई में इस रिपोर्ट के आधार पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की राह भी साफ हो सकती है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






