यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे में 9 मौतों पर मानवाधिकार आयोग का नोटिस, DM को जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

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यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम से 7 दिसंबर तक जांच रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी।

यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को नोटिस जारी कर हादसे की जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने जिलाधिकारी को 7 दिसंबर 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। हादसे के बाद बस में यात्रियों की सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन निकास को लेकर सवाल उठे थे। अब आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट में घटना के कारणों के साथ सुरक्षा इंतजामों और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।


23 सितंबर की रात हुआ था दर्दनाक हादसा

23 सितंबर की रात दिल्ली से महोबा जा रही एसी स्लीपर बस में जेवर क्षेत्र के पास यमुना एक्सप्रेसवे पर आग लग गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि बस में सवार नौ यात्रियों की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया। मामले में पुलिस चालक और परिचालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। हादसे के बाद बस में सुरक्षा इंतजामों और यात्रियों की जान बचाने के लिए उपलब्ध सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।


सुरक्षा इंतजामों और अधिकारियों की जवाबदेही की मांग

दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बस के भीतर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने की मांग की गई। इसमें अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास और हादसे के दौरान यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के इंतजामों की स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया। शिकायतकर्ता ने घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जांच होनी चाहिए, ताकि हादसे के कारणों का पता चल सके और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो।


7 दिसंबर तक देनी होगी रिपोर्ट, 8 को अगली सुनवाई

शिकायत पर सुनवाई के बाद मानवाधिकार आयोग ने गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग ने रिपोर्ट जमा करने के लिए 7 दिसंबर 2026 तक की समयसीमा तय की है। इसके अगले दिन यानी 8 दिसंबर को मामले की सुनवाई होगी। अब जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में हादसे की परिस्थितियों, बस में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। आयोग के निर्देश के बाद मामले की जांच और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर प्रशासन की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।

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