40 विदेशी सिविल सर्वेंट्स ने साइबर सिक्योरिटी सेल का किया दौरा, समझी साइबर ठगी रोकने की कार्यप्रणाली

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नोएडा के सेक्टर-108 स्थित साइबर सिक्योरिटी सेल में एनसीजीजी कार्यक्रम के तहत 40 सिविल सर्वेंट्स पहुंचे। पुलिस ने उन्हें साइबर ठगी में त्वरित कार्रवाई, संदिग्ध लेनदेन की जांच, डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल की जानकारी दी। विदेशी प्रतिनिधियों ने अनुभव भी साझा किए।

नोएडा। गौतमबुद्धनगर पुलिस की साइबर अपराध रोकने की कार्यप्रणाली को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने साझा किया गया। एनसीजीजी के कार्यक्रम के तहत 40 सिविल सर्वेंट्स ने सेक्टर-108 स्थित पुलिस आयुक्त कार्यालय में साइबर सिक्योरिटी सेल का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधियों को साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद होने वाली कार्रवाई, पीड़ितों की मदद और तकनीकी जांच की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में समय काफी अहम होता है। शिकायत मिलने पर तकनीकी टीम संदिग्ध लेनदेन, बैंक खातों और यूपीआई आईडी की जांच करती है, ताकि पीड़ित की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके।


डीसीपी साइबर प्रीति यादव ने प्रतिनिधियों को दी जानकारी
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर डीसीपी साइबर प्रीति यादव ने कार्यक्रम की अगुवाई की। गोष्ठी के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल अपराध की रोकथाम के लिए अपनाई जाने वाली पुलिस कार्यप्रणाली समझाई गई। अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठगी की शिकायत सामने आने के बाद शुरुआती समय में की गई कार्रवाई काफी महत्वपूर्ण होती है। तकनीकी टीम संदिग्ध लेनदेन की जानकारी जुटाने के साथ संबंधित बैंक खातों और यूपीआई आईडी की जांच करती है। इसका उद्देश्य ठगी की रकम को आगे जाने से रोकना और पीड़ित को राहत दिलाने की दिशा में तत्काल कार्रवाई करना है। प्रतिनिधियों को पुलिस की तकनीकी जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी दी गई।


डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और तकनीकी जांच पर जोर
प्रतिनिधियों को डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने और जांच के दौरान उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली को भी समय के साथ अपडेट करना जरूरी है। अपराधियों की पहचान करने और उनके नेटवर्क तक पहुंचने के लिए तकनीकी जांच के साथ अलग-अलग संस्थाओं के बीच तालमेल भी जरूरी है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत पर तेजी से कार्रवाई और तकनीकी जानकारी का सही इस्तेमाल प्रभावी साइबर पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गोष्ठी में साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका को लेकर भी प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई।


विदेशी प्रतिनिधियों ने साझा किए अपने देशों के अनुभव
कार्यक्रम के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों में साइबर अपराध से निपटने के अनुभव और चुनौतियां साझा कीं। साइबर सुरक्षा, डिजिटल अपराध की रोकथाम, तकनीकी संसाधनों और जांच की आधुनिक पद्धतियों को लेकर पुलिस अधिकारियों और प्रतिनिधियों के बीच चर्चा हुई। विदेशी प्रतिनिधियों ने गौतमबुद्धनगर पुलिस की तकनीक आधारित साइबर पुलिसिंग, शिकायतों के त्वरित निस्तारण और जन-जागरूकता से जुड़े प्रयासों में रुचि दिखाई। वहीं पुलिस अधिकारियों ने भी दूसरे देशों में साइबर अपराध से निपटने के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। पुलिस के मुताबिक इस तरह अनुभव साझा करने से साइबर अपराध के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों के बीच सहयोग को और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा हुआ साइबर पुलिसिंग का मॉडल
सेक्टर-108 स्थित साइबर सिक्योरिटी सेल के दौरे के जरिए गौतमबुद्धनगर पुलिस की साइबर अपराध नियंत्रण व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रखा गया। अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई, तकनीकी संसाधनों, डिजिटल साक्ष्यों और शिकायतों के निस्तारण से जुड़ी प्रक्रिया समझाई। पुलिस के मुताबिक साइबर अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ लगातार बदलते तरीकों की जानकारी रखना जरूरी है। कार्यक्रम में प्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों के बीच हुए अनुभवों के आदान-प्रदान से अलग-अलग देशों की कार्यप्रणाली को समझने का मौका मिला। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध की रोकथाम में तकनीकी क्षमता और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल भविष्य में प्रभावी कार्रवाई के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

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