नोएडा में साइबर ठगी से हड़कंप, रैपिडपे कंपनी के एजेंट के खाते से 43 ट्रांजेक्शन कर 1.56 करोड़ रुपये उड़ाए
- Shiv Kumar
- 08 Oct, 2026
नोएडा। साइबर अपराधियों ने रैपिडपे फिनटेक कंपनी के एक फील्ड एजेंट के मोबाइल फोन और उसमें इस्तेमाल हो रहे कंपनी के ऐप को निशाना बनाकर बैंक खाते से 1 करोड़ 56 लाख 68 हजार 668 रुपये निकाल लिए। कंपनी के मुताबिक, 3 अक्टूबर को सुबह 10:41 बजे से 11:04 बजे के बीच कुल 43 ऐसे लेनदेन किए गए, जिन्हें कंपनी ने मंजूरी नहीं दी थी। मामले में कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि जितिन जयशील करकेरास ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल जांच इस बात पर केंद्रित है कि मोबाइल और ऐप तक साइबर अपराधियों ने कैसे पहुंच बनाई और ठगी की रकम किन खातों में भेजी गई।
फील्ड एजेंट के मोबाइल से हुए फर्जी लेनदेन
शिकायत के मुताबिक, रैपिडपे फिनटेक डिजिटल वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती है और उसके फील्ड एजेंट मोबाइल ऐप के जरिए ग्राहकों के लेनदेन करते हैं। 3 अक्टूबर को कंपनी के बैंक खाते से अचानक कई ट्रांजेक्शन हुए, जिन्हें कंपनी ने अधिकृत नहीं किया था। जांच में सामने आया कि ये फर्जी लेनदेन सोनभद्र के विंढमगंज में तैनात फील्ड एजेंट धीरेज कुमार केशरी के मोबाइल फोन में इस्तेमाल किए जा रहे ऐप के जरिए हुए। कंपनी की ओर से एजेंट पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाया गया है। कंपनी को आशंका है कि मोबाइल फोन या ऐप के साथ छेड़छाड़ कर किसी दूसरे व्यक्ति ने इसका इस्तेमाल किया। अब पुलिस इसी पहलू की जांच कर रही है।
पुलिस खंगालेगी मोबाइल और ऐप की गतिविधियां
डीसीपी साइबर प्रीति यादव के मुताबिक, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने फील्ड एजेंट के मोबाइल फोन और रैपिडपे ऐप तक किस तरह पहुंच बनाई। इसके लिए मोबाइल डिवाइस की जांच के साथ ऐप में हुई गतिविधियों और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जाएगा। पुलिस बैंक खातों और ट्रांजेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि फर्जी लेनदेन की पूरी कड़ी सामने आ सके। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि 43 ट्रांजेक्शन किस प्रक्रिया से किए गए और इनके दौरान ऐप और मोबाइल में किस तरह की गतिविधियां हुईं। साइबर टीम डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
जिन खातों में पहुंची रकम, वहां भी जांच शुरू
साइबर अपराध की रकम किन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई, पुलिस अब इसकी जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन खातों में ठगी की रकम भेजी गई है, उनसे जुड़े बैंक अधिकारियों से पुलिस टीम ने संपर्क किया है। बैंक रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर रकम के आगे के लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि फर्जी ट्रांजेक्शन के पीछे कौन लोग हैं और उन्होंने कंपनी के बैंक खाते से रकम निकालने के लिए एजेंट के मोबाइल और ऐप का इस्तेमाल कैसे किया। डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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