यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के बाद बसों की सुरक्षा पर सख्ती, तीन दिन के अभियान में 47 बसें सीज और 76 के चालान

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यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के बाद ग्रेटर नोएडा में परिवहन विभाग ने ऑपरेशन कवच चलाया। 9 से 11 अक्टूबर तक 47 बसें सीज और 76 के चालान किए गए। सीज बसों का AIS-119 मानकों के तहत निरीक्षण होगा।

ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना में नौ लोगों की मौत के बाद परिवहन विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। ग्रेटर नोएडा के जिलाधिकारी के आदेश पर चलाए गए विशेष अभियान के तहत तीन दिनों में 47 बसों को सीज किया गया, जबकि 76 बसों के चालान काटे गए। यह अभियान 9 से 11 अक्टूबर तक चलाया गया। इसके दौरान बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच कर नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की गई।


तीन दिन तक चला विशेष अभियान

परिवहन विभाग ने 9 से 11 अक्टूबर तक ऑपरेशन कवच के तहत बसों की जांच की। इस विशेष अभियान का उद्देश्य नियमों का उल्लंघन कर सड़कों पर चल रही बसों के खिलाफ कार्रवाई करना था। अभियान के दौरान कुल 47 बसें सीज की गईं और 76 बसों के चालान किए गए। यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस अग्निकांड में नौ लोगों की मौत के बाद बसों की सुरक्षा और तकनीकी स्थिति को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है। जिलाधिकारी के आदेश के बाद परिवहन विभाग ने अभियान चलाकर नियमों का पालन नहीं करने वाली बसों पर शिकंजा कसा।


सीज बसों का AIS-119 मानकों के तहत होगा निरीक्षण

अभियान के दौरान सीज की गई बसों को छोड़ने से पहले उनकी तकनीकी जांच कराई जाएगी। इसके लिए बसों का AIS-119 मानकों के तहत निरीक्षण किया जाएगा। इस प्रक्रिया में वाहनों की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा से जुड़े मानकों की जांच होगी। परिवहन विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि बसें निर्धारित नियमों और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करती हैं या नहीं। निरीक्षण के बाद ही बसों को आगे चलाने की अनुमति देने पर फैसला लिया जाएगा। जिन वाहनों की स्थिति मानकों के अनुरूप नहीं होगी, उनके मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


फिटनेस और सुरक्षा मानकों पर खरी उतरने के बाद ही मिलेंगी बसें

सीज की गई बसों को तभी रिलीज किया जाएगा, जब वे फिटनेस और सुरक्षा मानकों पर खरी उतरेंगी। जांच के दौरान किसी बस में खामियां मिलने पर उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में बस का पंजीकरण और फिटनेस प्रमाणपत्र निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। परिवहन विभाग की इस कार्रवाई का मकसद नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर रोक लगाना और बसों की तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। तीन दिन चले अभियान में हुई कार्रवाई के बाद अब सीज बसों के निरीक्षण और उनके मानकों पर खरा उतरने की प्रक्रिया अहम होगी।

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