नोएडा प्राधिकरण का किसानों को बड़ा तोहफा, मुआवजे की दरों में 53 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी

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नोएडा प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मिलने वाले मुआवजे में करीब 53 प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। पहले दर 5,324 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी। किसान संगठनों ने बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए जमीन की वास्तविक कीमत के अनुसार मुआवजे की मांग उठाई है।

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे में बड़ी बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में मुआवजे की दर में करीब 53 प्रतिशत इजाफे को मंजूरी दी गई। इस फैसले का असर नोएडा क्षेत्र में जमीन देने वाले किसानों पर पड़ेगा। अब तक प्राधिकरण किसानों को जमीन अधिग्रहण के बदले 5,324 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देता था। नई दर के लागू होने से किसानों को जमीन के बदले पहले की तुलना में अधिक रकम मिल सकेगी। लंबे समय से किसान जमीन की कीमत और मिलने वाले मुआवजे के बीच अंतर का मुद्दा उठाते रहे हैं। हालांकि, किसानों की ओर से इस बढ़ोतरी को लेकर असंतोष भी जताया गया है। उनका कहना है कि जमीन की वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले मुआवजे की दर अब भी कम है। बोर्ड बैठक में मुआवजे के अलावा फ्लैटों की रजिस्ट्री और शहर की विकास योजनाओं से जुड़े अन्य फैसले भी लिए गए। इन फैसलों का असर किसानों, घर खरीदारों और नोएडा में विकास कार्यों पर पड़ सकता है।


कितना बढ़ा मुआवजा और क्यों

नोएडा प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजे की दर में करीब 53 प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इससे पहले किसानों को 5,324 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाता था। नई दर का उद्देश्य जमीन देने वाले किसानों को पहले के मुकाबले अधिक भुगतान करना है। जमीन अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं के दौरान मुआवजे की दर किसानों के लिए अहम मुद्दा रही है। किसानों का कहना है कि शहरीकरण बढ़ने के साथ उनकी जमीन की कीमत भी बढ़ी है, इसलिए मुआवजा तय करते समय वास्तविक कीमत का ध्यान रखा जाना चाहिए। प्राधिकरण की ओर से की गई बढ़ोतरी से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन किसान संगठनों ने इसे नाकाफी बताया है। उनका तर्क है कि प्राधिकरण जमीन लेकर विकसित क्षेत्रों में अधिक कीमत पर भूखंड बेचता है, जबकि किसानों को मिलने वाली रकम उससे कम रहती है।


बोर्ड बैठक में हुए अन्य फैसले

नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में किसानों के मुआवजे के अलावा फ्लैटों की रजिस्ट्री और विकास से जुड़े मुद्दों पर भी फैसले लिए गए। पुरानी सोसायटियों में लंबे समय से अटकी फ्लैट रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाने पर सहमति बनी। इससे उन घर खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो फ्लैट खरीदने के बाद भी रजिस्ट्री पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। बोर्ड बैठक में नई आवासीय योजनाओं में भूखंड आवंटन और शहर के बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। इन फैसलों का उद्देश्य नोएडा में विकास कार्यों को आगे बढ़ाना और लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान करना है। हालांकि, अलग-अलग योजनाओं के लागू होने की समयसीमा और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए प्राधिकरण के आधिकारिक आदेश देखना जरूरी होगा।


किन गांवों के किसानों को मिलेगा फायदा

मुआवजे में बढ़ोतरी का फैसला नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण से जुड़े किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। इसका लाभ किन गांवों में और किन मामलों में लागू होगा, यह संबंधित अधिग्रहण, योजना और प्राधिकरण के आदेशों के आधार पर तय होगा। हर गांव के लिए अलग-अलग लाभार्थियों की सूची या लागू होने वाली सभी शर्तों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए। किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनकी जमीन किस परियोजना के तहत ली जा रही है और मुआवजे की नई दर उस पर लागू होती है या नहीं। भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में जमीन के रिकॉर्ड, स्वामित्व और भुगतान की प्रक्रिया भी अहम होती है। इसलिए संबंधित गांव के किसान प्राधिकरण से नई दर, पात्रता और भुगतान की स्थिति की जानकारी लेकर ही आगे की प्रक्रिया पूरी करें।


पहले की मुआवजा दरों में क्या समस्या थी

किसानों की प्रमुख शिकायत रही है कि जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाला मुआवजा उसकी वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले कम होता है। नोएडा के आसपास शहरी विकास और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने के साथ जमीन की कीमत को लेकर किसानों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। किसान संगठनों का कहना है कि प्राधिकरण जमीन लेकर उसे विकसित करता है और बाद में अधिक कीमत पर बेचता है, जबकि मूल जमीन मालिक को मिलने वाला मुआवजा अपेक्षाकृत कम रहता है। इसी अंतर को लेकर किसान समय-समय पर अपनी मांग उठाते रहे हैं। नई बढ़ोतरी से मुआवजे की दर में बड़ा बदलाव हुआ है, लेकिन कुछ किसान प्रतिनिधियों ने इसे पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना है कि मुआवजा तय करते समय जमीन की मौजूदा कीमत और उससे होने वाले विकास को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस मुद्दे पर प्राधिकरण और किसान संगठनों के बीच आगे भी बातचीत की जरूरत रह सकती है।


किसानों की प्रतिक्रिया

मुआवजे में 53 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के फैसले पर किसान संगठनों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। बढ़ी हुई दर से जमीन देने वाले किसानों को पहले के मुकाबले अधिक रकम मिलने की उम्मीद है, लेकिन भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष ने इसे नाकाफी बताया। उनका कहना है कि जमीन की वास्तविक कीमत इससे कहीं अधिक है और किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। किसान प्रतिनिधियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि जमीन अधिग्रहण के बाद विकसित क्षेत्रों में प्राधिकरण को अधिक कीमत मिलती है, जबकि किसानों को उसका पूरा लाभ नहीं मिलता। नए नोएडा क्षेत्र के किसानों के साथ मुआवजे को लेकर भेदभाव होने की शिकायत भी सामने आई है। हालांकि, सभी किसानों की राय एक जैसी हो, ऐसा नहीं कहा जा सकता। अलग-अलग गांवों में जमीन की स्थिति, अधिग्रहण की योजना और मुआवजे की पात्रता के आधार पर किसानों की अपेक्षाएं अलग हो सकती हैं।


आगे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया कैसे बढ़ेगी

मुआवजे की नई दर का वास्तविक लाभ संबंधित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और प्राधिकरण के आदेशों के अनुसार मिलेगा। जिन किसानों की जमीन किसी योजना के लिए ली जानी है, उन्हें सबसे पहले यह देखना होगा कि नई दर उनके मामले में लागू है या नहीं। इसके बाद जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। मुआवजे की राशि और भुगतान की प्रक्रिया भी संबंधित आदेशों के आधार पर आगे बढ़ेगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे प्राधिकरण से लिखित जानकारी लेकर अपनी पात्रता और भुगतान की स्थिति स्पष्ट करें। जिन मामलों में मुआवजे या जमीन के रिकॉर्ड को लेकर विवाद है, उनमें संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। बोर्ड के फैसले के बाद अब उसके क्रियान्वयन और किसानों तक बढ़ी हुई दर का लाभ पहुंचने पर नजर रहेगी।

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