ग्रेटर नोएडा में सैकड़ों किसानों का हल्ला बोल, यमुना प्राधिकरण पर धरना देने जा रहे कई किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया

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ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण पर धरना देने जा रहे कई किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया। किसान नेता सुखबीर खलीफा और रुपेश वर्मा ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। किसान 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे और आबादी मामलों के निस्तारण की मांग कर रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा में अपनी मांगों को लेकर यमुना प्राधिकरण पर धरना देने जा रहे किसानों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में किसान जुट रहे थे, लेकिन धरना स्थल तक पहुंचने से पहले ही कई किसानों को हिरासत में ले लिया गया। किसान नेताओं सुखबीर खलीफा और रुपेश वर्मा ने यमुना प्राधिकरण पर धरना देने का ऐलान किया था। किसानों की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और आबादी से जुड़े मामलों का पूर्ण निस्तारण शामिल है। किसान इन मांगों को लेकर लंबे समय से प्राधिकरण से समाधान की मांग कर रहे हैं। प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई से क्षेत्र में हलचल बढ़ गई।


यमुना प्राधिकरण पर धरने के ऐलान के बाद जुटे किसान

किसान नेता सुखबीर खलीफा और रुपेश वर्मा की ओर से यमुना प्राधिकरण पर धरना देने का ऐलान किया गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी थी। दी गई जानकारी के मुताबिक, किसान अपनी मांगों को लेकर प्राधिकरण कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में ले लिया। किसानों को धरना स्थल तक पहुंचने से पहले रोके जाने की कार्रवाई के बाद प्रदर्शन को लेकर स्थिति चर्चा में आ गई। हालांकि, हिरासत में लिए गए किसानों की सटीक संख्या और पुलिस कार्रवाई के विस्तृत कारणों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।


10 प्रतिशत प्लॉट और 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की मांग

प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने और 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा उपलब्ध कराने का मुद्दा शामिल है। इसके साथ ही किसान आबादी से संबंधित मामलों का पूर्ण निस्तारण चाहते हैं। किसानों का कहना है कि इन मांगों का समाधान उनके हितों के लिए जरूरी है। प्राधिकरण से जुड़े भूमि और मुआवजे के मुद्दों पर समाधान की मांग को लेकर किसान धरना देने की तैयारी कर रहे थे। प्रदर्शन के जरिए किसान अपनी मांगों को प्रशासन और प्राधिकरण तक पहुंचाना चाहते हैं। इन मांगों पर प्राधिकरण की मौजूदा स्थिति और किसी संभावित वार्ता के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।


पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन पर टिकी नजरें

धरने में शामिल होने जा रहे किसानों को हिरासत में लिए जाने के बाद अब आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। किसानों की ओर से बड़ी संख्या में यमुना प्राधिकरण पहुंचने का ऐलान किया गया था, जबकि पुलिस ने रास्ते में ही कई प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। इस घटनाक्रम के बाद किसानों की मांगों और प्रशासन के रुख को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल, हिरासत में लिए गए किसानों की संख्या, उन्हें कहां ले जाया गया और उन्हें छोड़े जाने के संबंध में पुष्टि आवश्यक है। वहीं, 10 प्रतिशत भूखंड, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे और आबादी के मामलों के निस्तारण की मांग इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा बनी हुई है।

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