नोएडा में सोलर प्लांट से घटेगा प्रदूषण, 15 मेगावाट की परियोजना से पांच साल में 5 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करने की तैयारी
- Shiv Kumar
- 28 Oct, 2026
नोएडा में कार्बन उत्सर्जन कम करने और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए प्राधिकरण ने नई योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), तीन बहुमंजिला पार्किंग और गंगाजल के जलाशयों की छतों व खाली जगहों पर कुल 15 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने की तैयारी है। नोएडा प्राधिकरण इस प्रस्ताव को बोर्ड के सामने रखने जा रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य एसटीपी के संचालन में होने वाली बिजली की खपत कम करना और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घटाना है। प्राधिकरण के महाप्रबंधक जल-सीवर आरपी सिंह के मुताबिक, सोलर प्लांट लगने के बाद एसटीपी की बिजली खपत करीब आधी करने का लक्ष्य रखा गया है। प्राधिकरण का दावा है कि इस पहल से अगले पांच साल में 5 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, योजना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और इसके क्रियान्वयन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया बोर्ड की मंजूरी के बाद तय होगी।
चार एसटीपी में लगेंगे 6 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट
योजना के पहले हिस्से में सेक्टर-50, सेक्टर-54, सेक्टर-123 और सेक्टर-168 स्थित चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन स्थानों पर उपलब्ध खाली जमीन का इस्तेमाल कर कुल 6 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित करने की योजना है। एसटीपी में सीवरेज के पानी को साफ करने की प्रक्रिया लगातार चलती है, जिसमें मशीनों और अन्य उपकरणों के संचालन के लिए बिजली की जरूरत होती है। सोलर प्लांट से तैयार होने वाली बिजली का इस्तेमाल इन संयंत्रों को चलाने में किया जाएगा। इससे बिजली आपूर्ति के लिए ग्रिड पर निर्भरता घटाने और संचालन लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्राधिकरण के मुताबिक, एक एसटीपी में प्रतिदिन करीब 2,000 यूनिट बिजली की खपत होती है। सोलर प्लांट लगने के बाद इसमें लगभग 1,000 यूनिट प्रतिदिन की बचत का लक्ष्य है। हालांकि, वास्तविक बचत प्लांट की क्षमता, मौसम और बिजली की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
पार्किंग और गंगाजल जलाशयों पर भी लगाए जाएंगे सोलर पैनल
प्राधिकरण की योजना में एसटीपी के अलावा बहुमंजिला पार्किंग और गंगाजल के जलाशयों को भी शामिल किया गया है। प्रस्तावित 15 मेगावाट क्षमता को तीन हिस्सों में बांटा गया है। चार एसटीपी में 6 मेगावाट, सेक्टर-37, सेक्टर-16ए और सेक्टर-18 की बहुमंजिला पार्किंग में 6 मेगावाट और सेक्टर-65, सेक्टर-79, सेक्टर-118 तथा सेक्टर-132 स्थित गंगाजल जलाशयों में 3 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। इन स्थानों की छतों और खाली जगहों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाएगा। इस तरह शहर में पहले से मौजूद सार्वजनिक ढांचे का उपयोग करके बिजली तैयार करने की योजना है। इससे अलग से बड़े भूखंडों की जरूरत कम हो सकती है और प्राधिकरण की संपत्तियों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। प्रस्ताव लागू होने पर इन जगहों पर तैयार बिजली का इस्तेमाल संबंधित सुविधाओं में किया जाएगा या इसके उपयोग की व्यवस्था तय की जाएगी।
कंपनी करेगी प्लांट का संचालन, 25 साल तक चलाने की योजना
नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में सोलर प्लांट लगाने और उनका संचालन करने की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। प्राधिकरण को प्लांट स्थापित करने के लिए सीधे खर्च नहीं करना पड़ेगा। योजना के तहत इन संयंत्रों का संचालन 25 साल तक किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इसके लिए कंपनी के चयन, अनुबंध की शर्तों और बिजली के उपयोग से जुड़ी विस्तृत व्यवस्था का अंतिम ब्योरा प्रस्ताव की मंजूरी और आगे की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा। प्राधिकरण के महाप्रबंधक जल-सीवर आरपी सिंह के अनुसार, एसटीपी की बिजली खपत कम करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। उनके मुताबिक, बिजली की एक यूनिट बचने से करीब 30 ग्राम कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। इसी आधार पर पांच साल में 5 लाख टन उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा नोएडा एक्सप्रेसवे की स्ट्रीट लाइटों को सौर ऊर्जा से चलाने के लिए सेक्टर-108 में 1,000 वर्गमीटर क्षेत्र में 2.5 मेगावाट क्षमता का अलग सोलर प्लांट लगाने का काम शुरू हो चुका है। योजना के अनुसार, एक्सप्रेसवे की लाइटें शाम को चार घंटे सौर ऊर्जा से चलेंगी, जिसके बाद सामान्य बिजली आपूर्ति का इस्तेमाल किया जाएगा।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






