नोएडा में आग, भूकंप या केमिकल हादसे में क्या करें: जानें इमरजेंसी नंबर, फायर सेफ्टी नियम और सोसाइटी की तैयारी
- Shiv Kumar
- 28 Oct, 2026
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऊंची इमारतों, अस्पतालों, स्कूलों, आवासीय सोसाइटियों और औद्योगिक इकाइयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आग लगने, भूकंप आने या किसी फैक्ट्री में केमिकल रिसाव जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी हर निवासी के लिए जरूरी है। हादसे के समय घबराहट, गलत रास्ते से बाहर निकलने की कोशिश और जरूरी नंबरों की जानकारी नहीं होने से खतरा बढ़ सकता है। 24 अक्टूबर 2026 को नोएडा के रायपुर गांव में एक दुकान में आग लगने से एक मजदूर की मौत हो गई थी। इस घटना ने एक बार फिर आग से बचाव और सुरक्षित निकासी की जरूरत को सामने रखा। इससे पहले 18 सितंबर 2026 को गौतमबुद्ध नगर में राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। इसमें शारदा अस्पताल में आग, जेवर के नीमका स्थित द रेडिएशन स्कूल में भूकंप और हायर एप्लाइंसेस इंडिया की औद्योगिक इकाई में रासायनिक आपदा से निपटने का अभ्यास किया गया। ऐसे अभ्यास का मकसद अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल और बचाव व्यवस्था को परखना है। लेकिन आपदा के समय सबसे पहले लोगों को खुद सही कदम उठाने की जानकारी होनी चाहिए। अगर आप किसी ऊंची इमारत या सोसाइटी में रहते हैं, तो निकासी के रास्ते, अग्निशामक यंत्र, सुरक्षित खुले स्थान और इमरजेंसी नंबर पहले से पता रखें। इससे संकट के समय सही निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
नोएडा में आपदा की तैयारी क्यों जरूरी है
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बहुमंजिला आवासीय इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग रहते और काम करते हैं। किसी इमारत में आग लगने, भूकंप के झटके आने या रासायनिक गैस फैलने पर कुछ ही मिनटों में लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे समय में केवल दमकल या बचाव दल पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। निवासियों, सुरक्षा गार्डों, मेंटेनेंस टीम और सोसाइटी प्रबंधन को भी अपनी जिम्मेदारी पता होनी चाहिए। हर इमारत में आपात निकासी का रास्ता, सीढ़ियों तक पहुंच, अग्निशामक यंत्र और खुले सुरक्षित स्थान की जानकारी होनी चाहिए। बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग निवासियों की मदद के लिए पहले से योजना बनाना भी जरूरी है। सोसाइटी को समय-समय पर मॉक ड्रिल करानी चाहिए और अलार्म, इमरजेंसी लाइट तथा अग्निशमन उपकरणों की जांच करनी चाहिए। तैयारी का उद्देश्य सिर्फ नियम पूरे करना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में जान बचाने के लिए सही व्यवस्था तैयार रखना है।
18 सितंबर की राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल: तीन स्थानों पर भूकंप, आग और रासायनिक आपदा का अभ्यास
गौतमबुद्ध नगर में 18 सितंबर 2026 को राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल के तहत तीन अलग-अलग स्थानों पर आपदा से निपटने का अभ्यास किया गया। ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल में आग लगने की स्थिति, जेवर क्षेत्र के नीमका स्थित द रेडिएशन स्कूल में भूकंप और हायर एप्लाइंसेस इंडिया की औद्योगिक इकाई में रासायनिक आपदा का परिदृश्य तैयार किया गया। अभ्यास में प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और बचाव एजेंसियों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य लोगों की सुरक्षित निकासी, घायलों की मदद, संसाधनों के इस्तेमाल और विभागों के बीच तालमेल को परखना था। ऐसी मॉक ड्रिल से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि आपात स्थिति में कहां कमी रह सकती है। आवासीय सोसाइटियों को भी इससे सीख लेकर अपनी निकासी योजना तैयार करनी चाहिए। केवल ड्रिल आयोजित करना काफी नहीं है; उसके बाद सामने आई कमियों को दूर करना, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना और उपकरणों की नियमित जांच करना भी उतना ही जरूरी है।
हाल की औद्योगिक आग की घटनाओं से सबक
नोएडा के रायपुर गांव में 24 अक्टूबर 2026 को एक दुकान में आग लगने से एक मजदूर की मौत हुई थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वहां मरम्मत का काम चल रहा था और आग लगने के संभावित कारण के तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई थी। आग आसपास की अस्थायी दुकानों तक भी फैल गई थी। इस घटना से यह सीख मिलती है कि छोटी दुकान, कार्यस्थल या अस्थायी निर्माण क्षेत्र में भी आग से बचाव के इंतजाम जरूरी हैं। बिजली के खुले तार, खराब उपकरण, ज्वलनशील सामान और निकासी का बंद रास्ता खतरा बढ़ा सकते हैं। औद्योगिक इकाइयों और दुकानों में बिजली की नियमित जांच, उपयुक्त अग्निशामक यंत्र और खुले निकास की व्यवस्था होनी चाहिए। कर्मचारियों को यह भी पता होना चाहिए कि आग लगने पर किस रास्ते से बाहर निकलना है और किसे सूचना देनी है। आग लगने के कारण की पुष्टि जांच के बाद ही होती है, इसलिए किसी शुरुआती आशंका को अंतिम निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए।
आग लगने पर क्या करें और क्या न करें
घर, फ्लैट, कार्यालय या फैक्ट्री में आग दिखाई देने पर सबसे पहले आसपास के लोगों को सतर्क करें और फायर अलार्म उपलब्ध हो तो उसे सक्रिय करें। सुरक्षित रहते हुए तुरंत 112 या फायर सेवा के नंबर 101 पर सूचना दें। आग फैल रही हो या धुआं भर रहा हो, तो सामान बचाने या आग बुझाने में समय न गंवाएं। निर्धारित निकासी रास्ते से बाहर निकलें और धुएं से भरे हिस्से में जाने से बचें। धुआं ऊपर जमा हो सकता है, इसलिए बाहर निकलते समय नीचे रहकर आगे बढ़ना मददगार हो सकता है। दरवाजा खोलने से पहले उसके हैंडल या आसपास की गर्मी जांचें; दरवाजा बहुत गर्म हो तो उसे न खोलें और दूसरा सुरक्षित रास्ता तलाशें। तेल या बिजली से लगी आग पर पानी न डालें। लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और बाहर निकलने के बाद दोबारा इमारत में न जाएं। अगर रास्ता बंद हो गया है, तो सुरक्षित कमरे में जाकर दरवाजा बंद करें, दरारों से धुआं आने से रोकें और बचाव दल को अपनी जगह बताएं।
घर और फ्लैट में तुरंत उठाने वाले कदम
फ्लैट में आग लगने पर परिवार के सभी सदस्यों को पहले से तय सुरक्षित निकासी रास्ते की जानकारी होनी चाहिए। घर के मुख्य दरवाजे, बालकनी और सीढ़ियों के रास्ते में जूते, साइकिल, फर्नीचर या दूसरे सामान न रखें। रसोई में गैस की गंध आने पर बिजली के स्विच न चलाएं, आग न जलाएं और सुरक्षित दूरी पर जाकर मदद लें। अगर सुरक्षित तरीके से संभव हो तो गैस की आपूर्ति बंद करें, लेकिन रिसाव वाली जगह पर रुककर ऐसा करने की कोशिश न करें। बिजली के उपकरणों में चिंगारी या धुआं दिखाई देने पर उन्हें छूने से बचें। घर में धुआं भरने लगे तो सभी लोगों को तुरंत बाहर निकालें और बच्चों या बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें। बाहर निकलते समय दरवाजा बंद कर दें, लेकिन उसे लॉक न करें, ताकि बचाव दल अंदर पहुंच सके। परिवार के लिए इमारत से दूर एक तय मिलने की जगह रखें। आपात स्थिति में सभी सदस्यों की गिनती करें और दमकलकर्मियों को बताएं कि कोई व्यक्ति अंदर रह गया है या नहीं।
लिफ्ट का इस्तेमाल क्यों न करें, सुरक्षित निकासी कैसे करें
आग लगने के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। बिजली बंद होने, लिफ्ट के बीच में रुकने या धुएं के अंदर पहुंचने से व्यक्ति फंस सकता है। इसलिए इमारत में आग लगने पर सीढ़ियों और निर्धारित आपात निकासी मार्ग का इस्तेमाल करें। सीढ़ियों पर धक्का-मुक्की न करें और बच्चों, बुजुर्गों तथा दिव्यांग लोगों की मदद करें। बाहर निकलते समय लिफ्ट लॉबी या धुएं से भरे गलियारे में न रुकें। अगर सामान्य रास्ता बंद है, तो किसी दूसरे सुरक्षित निकास का उपयोग करें। इमारत से बाहर निकलने के बाद तय सुरक्षित स्थान पर जाएं और दमकलकर्मियों के निर्देशों का पालन करें। वापस अंदर जाकर मोबाइल, दस्तावेज या सामान लेने की कोशिश न करें। सोसाइटी प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फायर एग्जिट और सीढ़ियों के दरवाजे बाधारहित हों तथा आपातकालीन संकेत साफ दिखाई दें। निकासी योजना में हर मंजिल के लिए रास्ता और बाहर मिलने की जगह तय होनी चाहिए। मॉक ड्रिल के दौरान इन रास्तों को इस्तेमाल करके उनकी उपयोगिता भी जांचनी चाहिए।
फायर एक्सटिंग्विशर का सही इस्तेमाल
अग्निशामक यंत्र यानी फायर एक्सटिंग्विशर छोटी और शुरुआती आग को बुझाने में मदद कर सकता है, लेकिन हर तरह की आग पर एक ही यंत्र काम नहीं करता। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आग छोटी है, आपके पास पीछे हटने का सुरक्षित रास्ता है और धुआं तेजी से नहीं फैल रहा। यंत्र पर लिखे निर्देशों के अनुसार सुरक्षा पिन निकालें, नोजल को आग के आधार की ओर रखें, हैंडल दबाएं और आग के आधार पर आगे-पीछे स्प्रे करें। यह तरीका तभी अपनाएं जब आप प्रशिक्षित हों और आग बुझाने के लिए सही प्रकार का यंत्र उपलब्ध हो। बिजली के उपकरणों या ज्वलनशील तरल की आग पर पानी का इस्तेमाल न करें। अगर आग कुछ ही सेकंड में काबू में नहीं आती या धुआं बढ़ने लगता है, तो तुरंत पीछे हटकर बाहर निकलें और दमकल सेवा को बुलाएं। सोसाइटी और कार्यालयों में अग्निशामक यंत्र सही जगह पर, आसानी से पहुंच में और समय-समय पर जांचे हुए होने चाहिए। कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों को इनके इस्तेमाल का प्रशिक्षण देना भी जरूरी है।
भूकंप के झटके आएं तो क्या करें
भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराकर सीढ़ियों या दरवाजे की ओर भागने के बजाय तुरंत सुरक्षित स्थिति अपनाएं। यदि आप घर या कार्यालय के अंदर हैं, तो जमीन पर झुकें, किसी मजबूत मेज या डेस्क के नीचे जाएं और उसके पैर पकड़कर सिर तथा गर्दन को ढकें। अगर पास में मेज नहीं है, तो खिड़कियों, कांच, अलमारी और गिर सकने वाली चीजों से दूर अंदरूनी दीवार के पास नीचे बैठकर सिर को हाथों से ढकें। झटके चलते समय लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और बाहर निकलने की कोशिश में सीढ़ियों पर न दौड़ें। यदि आप बाहर हैं, तो इमारतों, बिजली के खंभों, पेड़ों और तारों से दूर खुले स्थान पर जाएं। वाहन में हैं तो सुरक्षित जगह रुकें और पुल, फ्लाईओवर तथा बिजली की लाइनों से दूरी रखें। झटके रुकने तक सुरक्षित स्थिति बनाए रखें। पहले से परिवार के साथ यह तय करें कि भूकंप के समय कहां जाना है और संपर्क न हो पाने पर कहां मिलना है।
ऊंची इमारतों में सुरक्षित जगह
नोएडा की बहुमंजिला सोसाइटियों में भूकंप के दौरान सुरक्षित जगह चुनना बेहद जरूरी है। झटके महसूस होने पर खिड़कियों, कांच के दरवाजों, भारी अलमारियों, लटकती लाइटों और ऐसी वस्तुओं से दूर रहें जो गिर सकती हैं। मजबूत मेज के नीचे जाना और सिर तथा गर्दन को ढकना आम तौर पर बेहतर कदम है। किसी कमजोर दीवार, बालकनी की रेलिंग या बाहरी दीवार के पास खड़े न हों। भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और सीढ़ियों की ओर तभी बढ़ें जब झटके रुक चुके हों तथा रास्ता सुरक्षित हो। इमारत से बाहर निकलने के बाद उससे दूर खुले स्थान पर रहें, क्योंकि बाहरी दीवारों या कांच के टुकड़ों के गिरने का खतरा हो सकता है। सोसाइटी प्रबंधन को आपातकालीन निकास, सीढ़ियों, अलार्म और खुले एकत्र होने वाले स्थान की जानकारी निवासियों तक पहुंचानी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सहायता योजना भी तैयार रखें। किसी इमारत को सुरक्षित मानने का अंतिम निर्णय जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ जांच के आधार पर होना चाहिए।
भूकंप के झटके रुकने के बाद की सावधानियां
भूकंप के झटके रुकने के बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, क्योंकि आफ्टरशॉक यानी दोबारा झटके आ सकते हैं। इमारत में दरार, गैस की गंध, टूटे बिजली के तार या पानी के पाइप में नुकसान दिखाई दे तो उस जगह से दूर रहें। क्षतिग्रस्त इमारत में वापस न जाएं, जब तक संबंधित अधिकारी या विशेषज्ञ उसे सुरक्षित न बता दें। अगर गैस रिसाव की आशंका हो, तो माचिस न जलाएं और बिजली के स्विच न चलाएं। सुरक्षित स्थान पर जाकर प्रशासन या आपात सेवा को सूचना दें। घायल व्यक्ति की मदद करते समय अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखें और गंभीर चोट वाले व्यक्ति को बिना जरूरत न हिलाएं। बाहर निकलते समय लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और खुले स्थान में इमारतों, दीवारों तथा बिजली के खंभों से दूरी रखें। परिवार के सदस्यों की मौजूदगी जांचें और जरूरत पड़ने पर 112 पर मदद मांगें। आधिकारिक सूचना सुनें और अफवाहों पर भरोसा न करें। घर में दोबारा प्रवेश करने से पहले बिजली, गैस और इमारत की सुरक्षा की जांच जरूरी है।
केमिकल हादसे में बचाव के उपाय
किसी फैक्ट्री, गोदाम या औद्योगिक इकाई में रासायनिक रिसाव होने पर सबसे पहले उस जगह से दूर जाएं और स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपात सेवा को सूचना दें। गैस या रसायन की पहचान करने, उसे छूने या रिसाव रोकने की कोशिश खुद न करें। किस दिशा में जाना सुरक्षित है, यह रसायन के प्रकार और हवा की दिशा पर निर्भर करता है। इसलिए मौके पर मौजूद अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। यदि अधिकारी इलाके से निकलने को कहें, तो निर्धारित रास्ते से दूर जाएं; अगर घर के अंदर रहने और दरवाजे-खिड़कियां बंद करने के निर्देश मिलें, तो उनका पालन करें। धुएं या गैस के बादल की ओर न बढ़ें और बिना सुरक्षा उपकरणों के प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश न करें। रसायन त्वचा या कपड़ों पर गिर गया हो, तो सुरक्षित जगह पहुंचकर आपात सेवा या चिकित्सक के निर्देश के अनुसार दूषित कपड़े हटाएं और त्वचा को पर्याप्त साफ पानी से धोएं, यदि ऐसा करना सुरक्षित हो। सांस लेने में दिक्कत, आंखों में तेज जलन या चक्कर आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
सोसाइटी और फैक्ट्री में आपदा से निपटने की तैयारी
आवासीय सोसाइटी, अस्पताल, स्कूल और फैक्ट्री प्रबंधन को लिखित आपदा प्रबंधन योजना तैयार रखनी चाहिए। इसमें आग, भूकंप और रासायनिक रिसाव जैसी अलग-अलग स्थितियों के लिए जिम्मेदार लोगों, निकासी मार्ग, सुरक्षित एकत्र होने की जगह और आपात संपर्क नंबरों का उल्लेख होना चाहिए। सुरक्षा गार्डों तथा कर्मचारियों को अलार्म बजाने, दमकल सेवा को सूचना देने और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। फायर अलार्म, अग्निशामक यंत्र, इमरजेंसी लाइट, निकास संकेत और जरूरत के अनुसार अन्य सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच होनी चाहिए। सीढ़ियों, फायर एग्जिट और आपात दरवाजों के सामने सामान न रखा जाए। सोसाइटी में रहने वाले लोगों को भी मॉक ड्रिल में शामिल करना चाहिए, ताकि वे वास्तविक स्थिति में रास्ता पहचान सकें। बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग निवासियों की सहायता के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान पहले से होनी चाहिए। ड्रिल के बाद कमियों की समीक्षा करके उन्हें दूर किया जाए। औद्योगिक इकाइयों में रासायनिक पदार्थों के भंडारण, चेतावनी संकेतों और रिसाव की स्थिति में सुरक्षित निकासी की विशेष व्यवस्था भी जरूरी है।
जरूरी इमरजेंसी नंबर: पुलिस, फायर और एम्बुलेंस
आपात स्थिति में सही नंबर पर तुरंत कॉल करने से मदद मिलने में देरी कम हो सकती है। भारत में 112 एकीकृत आपातकालीन नंबर है, जिसके जरिए पुलिस, फायर और स्वास्थ्य संबंधी आपात सहायता मांगी जा सकती है। फायर सेवा के लिए 101 और एम्बुलेंस के लिए उत्तर प्रदेश में 108 या 102 का उपयोग किया जा सकता है। आपदा प्रबंधन से जुड़ी सहायता के लिए उत्तर प्रदेश के संबंधित जिला नियंत्रण कक्ष की जानकारी भी पहले से रखें। कॉल करते समय अपना पता, सेक्टर, सोसाइटी या फैक्ट्री का नाम, नजदीकी पहचान और हादसे की प्रकृति साफ-साफ बताएं। आग में फंसे लोगों, घायल व्यक्तियों या रासायनिक रिसाव की जानकारी छिपाएं नहीं। फोन काटने से पहले ऑपरेटर के निर्देश सुनें और जरूरत पड़ने पर दोबारा संपर्क करें। बच्चों और बुजुर्गों को भी आपात नंबरों की जानकारी दें। इन नंबरों का इस्तेमाल केवल वास्तविक आपात स्थिति में करें।
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