न्यू नोएडा परियोजना पर किसानों का विरोध तेज, महापंचायत में 20 हजार रुपये गज मुआवजे के साथ युवाओं को रोजगार देने की उठी मांग

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ग्रेटर नोएडा में न्यू नोएडा परियोजना के विरोध में गौतमबुद्धनगर के 13 और बुलंदशहर के 37 गांवों के किसानों ने महापंचायत की। किसानों ने 20 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से प्लॉट, आबादी मामलों के निस्तारण और युवाओं को रोजगार देने की मांग रखी। मांगें पूरी होने तक जमीन नहीं देने का ऐलान किया।

ग्रेटर नोएडा में न्यू नोएडा परियोजना को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। गौतमबुद्धनगर के 13 और बुलंदशहर के 37 गांवों के किसानों ने महापंचायत कर प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने जमीन के बदले 20 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से प्लॉट देने, आबादी से जुड़े मामलों का निस्तारण करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग उठाई। महापंचायत में किसानों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक न्यू नोएडा के लिए जमीन नहीं दी जाएगी। उन्होंने परियोजना को बसने से रोकने का भी ऐलान किया। किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। महापंचायत के जरिए किसानों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए प्राधिकरण को चेतावनी दी कि इस बार वे अपने अधिकारों और मुआवजे के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।


50 गांवों के किसानों ने महापंचायत में उठाईं मांगें

महापंचायत में गौतमबुद्धनगर के 13 और बुलंदशहर के 37 गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों ने जमीन के बदले 20 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से प्लॉट देने की मांग रखी। इसके साथ ही गांवों की आबादी से जुड़े मामलों का निस्तारण करने और प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार देने की मांग भी उठाई गई। किसानों का कहना है कि न्यू नोएडा परियोजना के लिए जमीन लेने से पहले उनके पुराने और मौजूदा मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि प्राधिकरण की ओर से पहले भी कई वादे किए गए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया। इसी वजह से किसान अब केवल आश्वासन के आधार पर जमीन देने को तैयार नहीं हैं। महापंचायत में किसानों ने एकजुट होकर अपनी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रखने की बात कही।


मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने पहुंची टीम का पहले भी हुआ था विरोध

कुछ दिन पहले नोएडा प्राधिकरण ने मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने के लिए गांवों में कैंप लगाने की कोशिश की थी। हालांकि, ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और प्राधिकरण की टीम को वापस लौटना पड़ा। किसानों का कहना है कि जब तक मुआवजे की दर और अन्य मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक जमीन से जुड़ी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी। कैंप का विरोध करने के बाद अब किसान लगातार महापंचायत कर अपनी रणनीति और एकजुटता जाहिर कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्राधिकरण पहले भी किसानों के साथ किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है। इसलिए इस बार वे लिखित और ठोस समाधान चाहते हैं। किसानों ने स्पष्ट किया कि केवल बातचीत या आश्वासन से उनका विरोध खत्म नहीं होगा।


मांगें पूरी होने तक न्यू नोएडा के लिए जमीन नहीं देने का ऐलान

किसानों ने महापंचायत में दोहराया कि मुआवजे में बढ़ोतरी, आबादी के मामलों का निस्तारण और युवाओं को रोजगार देने की मांग पूरी होने तक न्यू नोएडा परियोजना के लिए जमीन नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होगा, तब तक परियोजना को आगे बढ़ने और बसने नहीं दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं में उनकी जमीन का इस्तेमाल होने पर उन्हें उचित मुआवजा और अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने प्राधिकरण से मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की। फिलहाल किसानों के विरोध और प्राधिकरण के बीच सहमति बनने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाली बातचीत और प्राधिकरण के रुख से आगे की स्थिति तय होगी।

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