भारत के खिलाफ शतक के बाद आईसीसी ने हश्मतुल्लाह शाहिदी को फटकार, एक डिमेरिट प्वाइंट भी मिला
- Babli Ansari
- 22 Jun, 2026
नई दिल्ली। भारत के खिलाफ तीसरे वनडे में शतक जड़ने के बावजूद अफगानिस्तान के कप्तान हश्मतुल्लाह शाहिदी पर आईसीसी की कार्रवाई हुई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने उन्हें खेल के दौरान पिच के संरक्षित हिस्से में बार-बार चलने के लिए आधिकारिक फटकार लगाई है और उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट प्वाइंट जोड़ दिया है। यह मामला 21 जून को खेले गए भारत-अफगानिस्तान मुकाबले से जुड़ा है, जहां शाहिदी ने 102 गेंदों में सधी हुई पारी खेली, लेकिन टीम को बड़ी हार से नहीं बचा सके। आईसीसी ने इसे लेवल-1 का उल्लंघन माना और शाहिदी ने आरोप स्वीकार कर लिए, इसलिए औपचारिक सुनवाई की नौबत नहीं आई।
क्या हुआ मैदान पर
मुकाबले के दौरान शाहिदी को अंपायरों ने पहले भी आगाह किया था कि वह पिच के संवेदनशील हिस्से पर बार-बार न जाएं। इसके बावजूद उन्हें उसी तरह चलते हुए पाया गया, जिसके बाद मैच अधिकारियों ने रिपोर्ट आगे बढ़ाई। आईसीसी के मुताबिक यह हरकत खेल की सतह को नुकसान पहुंचाने वाली मानी गई और इसी आधार पर अनुच्छेद के तहत कार्रवाई की गई। शाहिदी पर कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगा, लेकिन आधिकारिक चेतावनी और एक डिमेरिट प्वाइंट ने यह साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियमों का उल्लंघन हल्के में नहीं लिया जाता। अफगानिस्तान के लिए यह दोहरी चोट रही, क्योंकि कप्तान ने बल्ले से संघर्ष दिखाया, मगर मैदान पर अनुशासन की कसौटी पर वे चूक गए।
आईसीसी की प्रक्रिया और नियम
आईसीसी की कार्यप्रणाली के मुताबिक लेवल-1 अपराधों में सामान्यत: चेतावनी, जुर्माना या डिमेरिट प्वाइंट जैसी सजा दी जाती है। इस मामले में रिफरी ने उपलब्ध साक्ष्य देखने के बाद शाहिदी को दोषी माना और उन्होंने भी इसे मान लिया। सूत्रों के अनुसार, यही वजह रही कि मामला लंबी सुनवाई तक नहीं पहुंचा। क्रिकेट में संरक्षित पिच क्षेत्र को लेकर नियम बेहद सख्त हैं, क्योंकि लगातार आवाजाही से विकेट की सतह प्रभावित हो सकती है और गेंदबाज-बल्लेबाज दोनों पर असर पड़ता है। अफगान कप्तान का यह पहला अपराध बताया गया है, इसलिए दंड सीमित रखा गया, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज यह अंक आगे किसी भी बड़े विवाद में उनके खिलाफ गिना जाएगा।
टीम और टूर्नामेंट पर असर
इस कार्रवाई का सीधा असर फिलहाल अफगानिस्तान की टीम पर नहीं पड़ा है, लेकिन कप्तान के नाम के साथ जुड़ा अनुशासनात्मक बिंदु आगे दबाव बढ़ा सकता है। भारत के खिलाफ सीरीज का यह आखिरी मैच अफगान कैंप के लिए पहले ही कठिन रहा था, क्योंकि टीम को मजबूत विपक्ष के सामने संयम और अनुशासन दोनों की परीक्षा देनी पड़ी। शाहिदी की शतकीय पारी ने जरूर कुछ देर तक मुकाबला जीवंत रखा, लेकिन अंत में आईसीसी की यह कार्रवाई चर्चा में आ गई। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अफगान टीम प्रबंधन और कप्तान खुद इस प्रकरण के बाद मैदान पर अपने व्यवहार को किस तरह संभालते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छोटी-सी चूक भी रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाती है, और शाहिदी का मामला यही याद दिलाता है।
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