उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के बड़े फैसले: सरकारी नौकरी, युवाओं का रोजगार और धान खरीद पर नई तैयारी

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उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 2026 के दौरान सरकारी नौकरियों की जांच, युवाओं के कौशल विकास, किसानों को पीएम-किसान की किस्त और धान खरीद से जुड़े कई बड़े फैसले सामने आए। विधानसभा चुनाव से पहले सरकार का जोर रोजगार, निवेश और प्रशासनिक सख्ती पर दिख रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 2026 के आखिरी सप्ताह में सरकार ने रोजगार, किसान सहायता और प्रशासनिक जांच से जुड़े कई अहम फैसले किए हैं। सरकारी नौकरी पाने वालों के लिए पृष्ठभूमि सत्यापन के नियम कड़े किए गए हैं, जबकि युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के लिए पांच शहरों में पटेल स्किल जोन शुरू करने की घोषणा हुई है। किसानों के खातों में पीएम-किसान सम्मान निधि की नई किस्त भेजी गई और धान खरीद की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। विधानसभा चुनाव से पहले लिए गए इन फैसलों को सरकार की रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, एक ओर प्रशासनिक व्यवस्था में सख्ती का संदेश दिया गया है, तो दूसरी ओर ग्रामीण और युवा मतदाताओं को सीधा लाभ पहुंचाने पर जोर है।


सरकारी नौकरी में हिंसक प्रदर्शन पर सख्त रुख

प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की जांच अब पहले से ज्यादा कड़ी होगी। नई व्यवस्था के तहत हिंसक आंदोलनों में शामिल रहे या सामाजिक अशांति फैलाने वाले संगठनों से जुड़े उम्मीदवारों को नियुक्ति से बाहर किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, 21 वर्ष की उम्र के बाद हिंसक प्रदर्शन में भागीदारी या सत्यापन से पहले के तीन वर्षों में ऐसी गतिविधियों का रिकॉर्ड सामने आने पर अभ्यर्थी पर कार्रवाई होगी। चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति से पहले स्वघोषणा और निर्धारित सत्यापन प्रपत्र जमा करना पड़ेगा। सुरक्षा से जुड़े पदों के लिए पूरी पुलिस जांच नियुक्ति से पहले अनिवार्य रहेगी। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को रिपोर्ट देने के लिए 30 दिन की समयसीमा तय की गई है। सरकार का तर्क है कि संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले उम्मीदवारों का आचरण साफ होना जरूरी है, हालांकि इस फैसले से पारदर्शी जांच और अपील की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठेंगे।


युवाओं के लिए पांच शहरों में स्किल जोन

रोजगार के मोर्चे पर सरकार ने लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, झांसी और गौतमबुद्धनगर में सरदार वल्लभभाई पटेल स्किल ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयमेंट जोन विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इन केंद्रों में दसवीं पास युवाओं को पंजीकरण, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजना है। अभी संचालन की अंतिम समयसीमा और प्लेसमेंट के लक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन सरकार ने इसे रोजगार अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। लखनऊ में कौशल और रोजगार से जुड़ी योजनाओं के लिए 1,725 करोड़ रुपये के बजट का भी उल्लेख किया गया है। मुख्यमंत्री ने निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, डिजिटल ढांचे और स्टार्टअप को रोजगार का आधार बनाने पर जोर दिया है। सरकार के अनुसार प्रदेश में करीब 25 हजार स्टार्टअप और 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं। युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला बनाने के लिए ब्याजमुक्त और बिना गारंटी ऋण योजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।


किसानों के खातों में किस्त, एक नवंबर से धान खरीद

किसानों के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर भी अक्टूबर के अंत में कई घोषणाएं हुईं। प्रदेश के 2.24 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में पीएम-किसान सम्मान निधि की 4,482.19 करोड़ रुपये की किस्त प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए भेजी गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत उत्तर प्रदेश के किसानों को अब तक 1.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक मिल चुके हैं। दूसरी ओर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश, लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव में एक नवंबर से धान खरीद शुरू होगी। सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय है। सरकार ने 65 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा है। करीब 4,500 केंद्रों पर खरीद होगी और भुगतान 48 घंटे में करने का दावा किया गया है। किसानों को सफाई और उतराई के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अलग से मिलेंगे।

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