मेटा की छंटनी से घबराए स्टूडेंट्स, क्या अब भी सही है बीटेक करना? बीटेक कोर्स में एडमिशन से पहले समझें स्कोप

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मेटा में बड़ी छंटनी के बाद बीटेक और इंजीनियरिंग करियर को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल डिग्री नहीं, बल्कि एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसी आधुनिक स्किल्स ही भविष्य में इंजीनियरिंग छात्रों के लिए बेहतर नौकरी और करियर के अवसर तय करेंगी।

टेक इंडस्ट्री में एक बार फिर बड़े स्तर पर छंटनी की खबरों ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे और बीटेक में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया कंपनी मेटा द्वारा हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले समय में इंजीनियरिंग की डिग्री का महत्व कम हो जाएगा। हालांकि करियर एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा दौर में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल सबसे ज्यादा मायने रखती है। ऐसे में जो छात्र नई तकनीकों और आधुनिक स्किल्स पर काम कर रहे हैं, उनके लिए भविष्य में अवसरों की कमी नहीं होने वाली है।


सिर्फ डिग्री नहीं, अब स्किल्स से बनेगा करियर

विशेषज्ञों का कहना है कि टेक कंपनियों में हो रही छंटनी का मतलब यह नहीं है कि बीटेक का स्कोप खत्म हो गया है। असल बदलाव अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई और इंडस्ट्री की जरूरतों में आया है। पहले जहां केवल डिग्री मिलने के बाद नौकरी आसानी से मिल जाती थी, वहीं अब कंपनियां ऐसे इंजीनियर चाहती हैं जो नई टेक्नोलॉजी के साथ खुद को लगातार अपडेट रखें। कोरोना काल के दौरान बड़ी कंपनियों ने जरूरत से ज्यादा भर्ती कर ली थी और अब वे अपने सिस्टम को बैलेंस कर रही हैं। इसका असर कैंपस प्लेसमेंट पर जरूर पड़ा है, लेकिन अच्छी स्किल रखने वाले छात्रों की मांग अभी भी बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन छात्रों के पास प्रैक्टिकल नॉलेज, प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस और मजबूत कोडिंग स्किल्स हैं, उनके लिए आज भी शानदार मौके मौजूद हैं।


इन नई टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में बढ़ रही डिमांड

अब समय केवल पारंपरिक कंप्यूटर साइंस डिग्री का नहीं, बल्कि स्पेशलाइजेशन का है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे सेक्टर्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कंपनियां ऐसे इंजीनियर्स की तलाश में हैं जो केवल किताबों तक सीमित न हों, बल्कि लाइव प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्री टूल्स पर भी काम कर चुके हों। फुल स्टैक डेवलपमेंट और बिग डेटा एनालिसिस जैसी स्किल्स भी युवाओं के लिए नए अवसर तैयार कर रही हैं। करियर सलाहकारों का कहना है कि आने वाले समय में वही छात्र आगे निकलेंगे जो कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ इंटर्नशिप, ऑनलाइन कोर्स और टेक्निकल प्रोजेक्ट्स पर लगातार काम करेंगे।


कॉलेज चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों के मुताबिक अब किसी भी सामान्य इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री लेना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। बीटेक में एडमिशन लेने से पहले छात्रों को कॉलेज की लैब फैसिलिटी, इंडस्ट्री कनेक्शन, प्लेसमेंट रिकॉर्ड और इंटर्नशिप अवसरों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। कंपनियां अब केवल मार्कशीट नहीं देखतीं, बल्कि यह भी जांचती हैं कि छात्र ने पढ़ाई के दौरान कितने प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स किए हैं और उसकी समस्या सुलझाने की क्षमता कितनी मजबूत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान दौर में इंजीनियरिंग छात्रों को खुद को “फ्यूचर-रेडी” बनाना होगा, क्योंकि अगले कुछ वर्षों में एआई आधारित तकनीकों की डिमांड और तेजी से बढ़ने वाली है। 

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