मिडिल ईस्ट तनाव से नोएडा का कारोबार हुआ प्रभावित ! 16 हजार करोड़ का नुकसान

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर नोएडा के परिधान कारोबार पर साफ दिखने लगा है। निर्यात ऑर्डर अटके हैं, शिपिंग महंगी हुई है और उद्योग जगत को करीब 16 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया जा रहा है।

नोएडा। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अस्थिरता का असर अब नोएडा के परिधान उद्योग पर भी भारी पड़ने लगा है। निर्यातकों का कहना है कि खाड़ी और पश्चिम एशियाई बाजारों से आने वाले ऑर्डर या तो टल रहे हैं या फिर बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं। समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से मालभाड़ा भी ऊपर गया है और सप्लाई चेन की लागत कई गुना बढ़ गई है। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक इस झटके का सीधा असर सिर्फ बड़े निर्यातकों पर नहीं, बल्कि उनके साथ काम करने वाली सैकड़ों इकाइयों, पैकिंग यूनिटों और मजदूरों तक पहुंचा है। शुरुआती आकलन में कारोबार को लगभग 16 हजार करोड़ रुपये तक के नुकसान की बात कही जा रही है, जिससे पूरा सेक्टर दबाव में आ गया है।

ऑर्डर रुके, शिपमेंट फंसे और मार्जिन ध्वस्त

जानकारी के मुताबिक नोएडा और आसपास के औद्योगिक इलाकों में तैयार किए जाने वाले गारमेंट्स का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया, खाड़ी देशों और यूरोप के रास्ते वहां तक पहुंचता है। लेकिन तनाव बढ़ते ही कई शिपिंग लाइनों ने रूट बदल दिए, कुछ ने अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क जोड़ दिए और कुछ मामलों में कंटेनरों की बुकिंग ही मुश्किल हो गई। निर्यातकों का कहना है कि जो ऑर्डर पहले 30 से 45 दिन में निकल जाते थे, वे अब अटक रहे हैं। कई खरीदारों ने डिलीवरी डेट आगे बढ़ाने की मांग की है, जबकि कुछ ने नए ऑर्डर पर फिलहाल रोक लगा दी है। नतीजा यह है कि तैयार माल गोदामों में पड़ा है और कैश फ्लो पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

उद्योग जगत का आकलन है कि सबसे ज्यादा चोट मिड-साइज और छोटे निर्यातकों को लगी है, जिनके पास लागत झेलने की गुंजाइश कम होती है। कच्चे माल, बिजली, मजदूरी और लॉजिस्टिक्स की कीमत पहले ही ऊपर थी, अब युद्धजनित संकट ने रफ्तार और तोड़ दी है। निर्यात पर असर का सीधा मतलब यह भी है कि उत्पादन चक्र धीमा पड़ेगा और अस्थायी कामगारों की मांग घट सकती है। सूत्रों के अनुसार कुछ फैक्ट्रियों में शिफ्टें कम करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। कारोबारियों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं संभली तो आने वाले हफ्तों में रद्द ऑर्डरों की संख्या और बढ़ सकती है।

पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई व्यापारिक अनिश्चितता

पश्चिम एशिया में तनाव से सिर्फ कपड़ा ही नहीं, भारत का निर्यात-आयात ढांचा भी प्रभावित हो रहा है। देश के व्यापारिक गलियारों पर इसका असर पहले ही दिखना शुरू हो गया है। ईरान और आसपास के क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से न केवल शिपिंग समय बढ़ा है, बल्कि बीमा और सुरक्षा लागत भी ऊपर चली गई है। केंद्रीय स्तर पर भी इस संकट को लेकर चिंता जताई गई है। भारतीय एयरलाइंस के लिए एटीएफ मूल्य निर्धारण पर हालिया फैसलों में सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान अस्थिर कीमतों से राहत देने की कोशिश की है, जिससे पता चलता है कि असर सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं है, परिवहन और ऊर्जा लागत भी दबाव में हैं।

नोएडा का परिधान उद्योग पहले ही वैश्विक मंदी, महंगाई और ऑर्डर शिफ्टिंग की चुनौतियों से जूझ रहा था। अब पश्चिम एशिया संकट ने उसके सामने नई अनिश्चितता खड़ी कर दी है। कारोबारियों का कहना है कि अगर हालात लंबे खिंचे तो निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी कमजोर पड़ सकती है और प्रतिस्पर्धी देशों को फायदा मिल सकता है। फिलहाल उद्योग प्रतिनिधि सरकार से मालभाड़ा राहत, आसान क्रेडिट और शिपिंग व्यवस्था में स्थिरता की मांग कर रहे हैं। उनकी नजर अब इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है या नहीं, क्योंकि उसी पर नोएडा के इस बड़े सेक्टर की अगली चाल टिकी है।

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