लोकभवन रायपुर में अधिकारियों को AI के इस्तेमाल की ट्रेनिंग, शासन व्यवस्था में तकनीक की नई दस्तक

top-news
रायपुर के लोकभवन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, फायदे और प्रशासनिक कामकाज में इसकी भूमिका समझाई गई। विशेषज्ञ लक्षित सेठिया ने एआई को भविष्य की जरूरत बताते हुए डिजिटल शासन की दिशा पर जोर दिया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लोकभवन में मंगलवार को हुए एक अहम प्रशिक्षण सत्र ने प्रशासनिक कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका को सामने ला दिया। कार्यक्रम में राज्य के अधिकारियों को एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल, उसके फायदे और कामकाज में उसकी सीमाओं को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई। एआई एक्सपर्ट लक्षित सेठिया ने प्रस्तुति के दौरान साफ कहा कि आने वाले वक्त में तकनीक को नजरअंदाज कर काम करना मुश्किल होगा। लोकभवन में हुई इस कवायद को सरकार के उस रुख से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें डिजिटल गवर्नेंस और स्मार्ट प्रशासन पर लगातार जोर बढ़ रहा है।

प्रशिक्षण सत्र में क्या हुआ

जानकारी के मुताबिक, सत्र की मुख्य फोकस एरिया प्रशासनिक प्रक्रियाओं में एआई के उपयोग पर रहा। अधिकारियों को बताया गया कि किस तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से फाइल निपटान, डेटा विश्लेषण, शिकायतों की छंटाई और निर्णय प्रक्रिया को ज्यादा तेज और सटीक बनाया जा सकता है। लक्षित सेठिया ने उदाहरणों के जरिये समझाया कि एआई केवल बड़े कॉर्पोरेट या तकनीकी कंपनियों का विषय नहीं है, बल्कि अब सरकारी दफ्तरों की जरूरत भी बनता जा रहा है। प्रशिक्षण में मौजूद अफसरों ने सवाल-जवाब के जरिए यह भी समझने की कोशिश की कि किन कामों में एआई सहायक बन सकता है और किन मामलों में मानवीय निगरानी जरूरी रहेगी।

इस तरह के सत्र का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सरकारी मशीनरी में डिजिटल टूल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। ई-ऑफिस, ऑनलाइन फाइल मूवमेंट और डाटा-बेस्ड फैसलों के दौर में एआई को एक अतिरिक्त परत की तरह देखा जा रहा है, जो रफ्तार भी बढ़ा सकती है और त्रुटियां भी घटा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अधिकारियों को समय रहते इन तकनीकों की ट्रेनिंग मिलती है, तो नीति-निर्माण से लेकर जनसेवा तक कई स्तरों पर कामकाज सुधर सकता है। लोकभवन में हुआ यह कार्यक्रम उसी दिशा में शुरुआती लेकिन अहम कदम माना जा रहा है।

डिजिटल शासन की तरफ बढ़ता कदम

छत्तीसगढ़ में बीते कुछ समय से तकनीक-आधारित प्रशासन पर जोर तेज हुआ है और यह प्रशिक्षण उसी बड़े बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में एआई स्किलिंग, डिजिटल लिटरेसी और डेटा गवर्नेंस से जुड़े कार्यक्रम लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे यह साफ है कि सरकारें अब तकनीक को केवल सुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता का औजार मान रही हैं। रायपुर का यह सत्र भी इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखा, जहां अधिकारियों को नए दौर की चुनौतियों के हिसाब से तैयार करने की कोशिश की गई।

सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में ऐसे और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं ताकि विभागीय स्तर पर एआई को लेकर समझ बढ़े और इसके इस्तेमाल को लेकर कोई हिचक न रहे। खास बात यह है कि प्रशासनिक ढांचे में तकनीक का यह प्रवेश सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिकायत निवारण, निगरानी, रिकॉर्ड प्रबंधन और सेवा वितरण जैसे मोर्चों पर भी असर डालेगा। लोकभवन का यह कार्यक्रम उसी बदलाव का संकेत है, जहां सरकार अब अधिकारियों को सिर्फ नियम-कानून नहीं, बल्कि डेटा और डिजिटल सिस्टम के साथ काम करने के लिए भी तैयार कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *