टेलीग्राम बैन पर राहुल गांधी का हमला, कहा- पेपर लीक के नाम पर छात्रों को सजा
- Babli Ansari
- 17 Jun, 2026
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उनका कहना है कि पेपर लीक रोकने के नाम पर सरकार असली दोषियों तक पहुंचने के बजाय छात्रों पर ही शिकंजा कस रही है। जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई NEET-UG से जुड़े कथित लीक नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए की गई है, लेकिन विपक्ष इसे गलत दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है। राहुल गांधी ने अपने बयान में साफ कहा कि लाखों छात्र टेलीग्राम का इस्तेमाल पढ़ाई, नोट्स, टेस्ट सीरीज और चर्चा के लिए करते रहे हैं। ऐसे में पूरे प्लेटफॉर्म को दंडित करना न तो न्यायसंगत है और न ही असरदार।
राहुल गांधी ने साधा सीधा निशाना
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने इस कदम को छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करार दिया और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि चोर को पकड़ने के बजाय पीड़ित के दरवाजे पर ताला लगा देना किसी समस्या का हल नहीं होता। कांग्रेस नेता का कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोहों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उससे पहले करोड़ों युवाओं के शैक्षणिक इस्तेमाल वाले मंच को बंद कर देना गलत संदेश देता है। इस टिप्पणी के बाद मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है और कांग्रेस ने इसे युवाओं की परेशानी से जोड़कर केंद्र को घेरना शुरू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि टेलीग्राम पर यह कदम NEET-UG री-एग्जाम से पहले उठाया गया, ताकि परीक्षा सामग्री के कथित प्रसार को रोका जा सके। सरकारी तर्क यह है कि कुछ चैनलों और समूहों के जरिए लीक हुई जानकारियां फैल रही थीं, इसलिए प्लेटफॉर्म पर रोक जरूरी हो गई। लेकिन आलोचकों का कहना है कि तकनीकी मंचों पर पाबंदी लगाने से असली नेटवर्क खत्म नहीं होता, वह केवल दूसरी जगह शिफ्ट हो जाता है। यही वजह है कि राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि अगर आज टेलीग्राम पर रोक लग सकती है, तो कल किसी और ऐप पर भी यही रास्ता अपनाया जा सकता है।
NEET-UG विवाद के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
परीक्षा लीक और भर्ती गड़बड़ियों के मुद्दे पर पहले से ही सरकार दबाव में है, और अब टेलीग्राम बैन ने इस बहस को और तेज कर दिया है। कांग्रेस इसे छात्रों के हितों के खिलाफ कदम बता रही है, जबकि सरकार की तरफ से अभी तक इस आलोचना का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ एक ऐप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल निगरानी, परीक्षा सुरक्षा और छात्रों की पहुंच जैसे बड़े सवालों को भी हवा देगा। राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि अगर सरकार ने असली माफिया पर शिकंजा नहीं कसा, तो यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
इस पूरे प्रकरण ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं में भी बेचैनी बढ़ा दी है। कई छात्र संगठनों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आज पढ़ाई का अहम हिस्सा बन चुके हैं और ऐसे में बिना विकल्प दिए उन पर रोक लगाना ठीक नहीं है। दूसरी तरफ, परीक्षा तंत्र से जुड़े अधिकारी मानते हैं कि लीक रोकने के लिए सख्ती जरूरी है। अब निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार इस विवाद पर क्या स्पष्ट रुख अपनाती है और क्या टेलीग्राम पर लगी रोक को लेकर कोई नई समीक्षा सामने आती है। फिलहाल राहुल गांधी का हमला इस मुद्दे को सीधे राजनीति के केंद्र में ले आया है।
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