AI के दौर में इन स्किल्स की सबसे ज्यादा मांग! नौकरी के साथ मिलेगा आकर्षक सैलरी पैकेज
- Shiv Kumar
- 30 Jul, 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच जहां नौकरियों पर खतरे की चर्चा हो रही थी, वहीं अब एक नया जॉब रोल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसका नाम डिजिटल लेबर मैनेजर है। दुनिया भर की कई टेक कंपनियां इस प्रोफाइल के लिए प्रोफेशनल्स की भर्ती कर रही हैं। इस भूमिका में इंसानों और AI आधारित डिजिटल वर्कर्स के बीच समन्वय स्थापित करना होता है। खास बात यह है कि इस नौकरी के लिए एडवांस कोडिंग की बजाय AI टूल्स की समझ, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और समस्या समाधान जैसी स्किल्स ज्यादा अहम मानी जा रही हैं।
क्या होता है डिजिटल लेबर मैनेजर का काम?
डिजिटल लेबर मैनेजर का मुख्य काम कंपनी में इस्तेमाल होने वाले AI बॉट्स, सॉफ्टवेयर एजेंट्स और डिजिटल वर्कर्स की निगरानी करना होता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि AI सही तरीके से काम कर रहा है, सटीक परिणाम दे रहा है और कंपनी के बिजनेस लक्ष्यों के अनुसार कार्य कर रहा है। इसके अलावा AI को नए निर्देश देना, उसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करना और जहां जरूरत हो वहां इंसानी कर्मचारियों के साथ तालमेल बनाकर समस्याओं का समाधान कराना भी इसी भूमिका का हिस्सा है।
लाखों रुपये का पैकेज, इन स्किल्स की है जरूरत
इस जॉब रोल में शुरुआती स्तर पर ही 8 से 15 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज मिल सकता है। वहीं 2 से 3 साल का अनुभव रखने वाले प्रोफेशनल्स 25 से 40 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज हासिल कर सकते हैं। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, क्रिटिकल थिंकिंग, बेसिक टेक्निकल समझ, वर्कफ्लो ऑटोमेशन और नो-कोड टूल्स की जानकारी होना फायदेमंद माना जाता है।
ऐसे कर सकते हैं करियर की शुरुआत
विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवार चैटजीपीटी, क्लाउड, ऑटोजीपीटी जैसे एआई टूल्स के साथ काम करना सीख सकते हैं। इसके अलावा जैपियर और मेक जैसे नो-कोड ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म की जानकारी भी उपयोगी साबित हो सकती है। AI मैनेजमेंट और वर्कफ्लो ऑटोमेशन से जुड़े ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स करने से रिज्यूमे मजबूत होता है और इस क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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