गाजियाबाद में नौकरी के नाम पर 4 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, फर्जी कॉल सेंटर पर छापा, 17 युवतियों समेत 20 गिरफ्तार

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गाजियाबाद में नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने खुलासा किया है। स्वाट टीम और साहिबाबाद पुलिस ने 17 युवतियों समेत 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गैंग ने दो साल में 4 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है।

नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। स्वाट टीम और साहिबाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने वाले 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 17 युवतियां भी शामिल हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले दो साल से राजेंद्र नगर इलाके में अवैध कॉल सेंटर चला रहा था और अब तक 4 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। बुधवार दोपहर करीब दो बजे डीसीपी ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर पूरे मामले का खुलासा किया।


मखाने के कारोबार की आड़ में चल रहा था ठगी का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, गिरोह का मुख्य आरोपी पीयूष जैन बीटेक पास है। उसने जैनसन इंटरनेशनल नाम से एक रजिस्टर्ड कंपनी बना रखी थी, जिसके जरिए मखाने का कारोबार दिखाया जाता था। इसी कंपनी की आड़ में पीयूष जैन अपनी पत्नी हिना, मामा सुनील जैन और सलीम के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। कॉल सेंटर में बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। युवाओं से रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस और इंटरव्यू के नाम पर पैसे वसूले जाते थे। इसके बाद फर्जी इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी कराकर जॉइनिंग लेटर तक जारी कर दिए जाते थे। नौकरी नहीं मिलने पर शिकायत करने पहुंचे लोगों को डराने-धमकाने और मारपीट करने की बात भी जांच में सामने आई है।


वेबसाइटों से जुटाते थे बेरोजगारों का डेटा

पूछताछ में कॉल सेंटर कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि ठगी के लिए बेरोजगार युवाओं का डेटा जुटाया जाता था। यह डेटा Foundit.com और Naukri.com जैसी वेबसाइटों से हासिल किया जाता था। कुछ डेटा सेटिंग के जरिए खरीदा भी जाता था। इसके बाद युवाओं की जानकारी पेन ड्राइव में डालकर कॉलिंग करने वाली युवतियों को दी जाती थी। कॉल करने वाली युवतियां खुद को बड़ी कंपनियों से जुड़ा बताकर नौकरी का भरोसा दिलाती थीं। इसके बाद अलग-अलग शुल्क के नाम पर रकम जमा कराई जाती थी। गिरोह फर्जी आईडी पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था, जिनकी व्यवस्था आरोपी सलीम करता था।


बीसीए-बीबीए पास युवतियां भी थीं गिरोह का हिस्सा

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार 17 युवतियों में कई बीसीए और बीबीए जैसी प्रोफेशनल डिग्री रखने वाली हैं, जबकि कुछ 12वीं पास हैं। इन्हें कॉलिंग के काम के लिए 15 हजार से 30 हजार रुपये तक का मासिक वेतन नकद दिया जाता था, ताकि बैंकिंग रिकॉर्ड में लेनदेन दर्ज न हो। पुलिस ने बताया कि ये युवतियां अपने परिवार और परिचितों को भी खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताती थीं। गिरोह ने दिल्ली समेत कई राज्यों के बेरोजगार युवाओं को सऊदी अरब और दुबई में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगा। पीड़ितों से 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक वसूले गए।


400 से 500 युवाओं को बनाया ठगी का शिकार

जांच में सामने आया है कि यह गैंग अब तक करीब 400 से 500 बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बना चुका है। पुलिस को फिलहाल 24 लिखित शिकायतें मिली हैं। जांच में ठगी की रकम 4 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। पुलिस का कहना है कि पीड़ितों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। पुलिस पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि पूछताछ के दौरान साइबर ठगी से जुड़े कई अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।


कॉल सेंटर से बरामद हुए कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 लैपटॉप, 23 स्मार्टफोन, 12 कीपैड मोबाइल, 47 सिम कार्ड, 16 डेबिट कार्ड, 10 फर्जी मुहरें, 8 चेकबुक, बड़ी संख्या में फर्जी वोटर आईडी कार्ड, 2 प्रिंटर, 12 पावर एडॉप्टर, 7 पेन ड्राइव और एक ऑडी कार बरामद की है। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।

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