पॉल्यूशन से फैल रहा लंग कैंसर, प्रदूषण के असर को ऐसे करें कम, बढ़ जाएगी जिंदगी
- Shiv Kumar
- 15 Jan, 2026
दिल्ली-NCR की हवा अब सिर्फ असहज नहीं, बल्कि जानलेवा होती जा रही है। जिस शहर की शामें कभी शायरी और रोमांस का हिस्सा हुआ करती थीं, वहां आज लोग हवा नहीं बल्कि ज़हर में सांस ले रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दिल्ली में स्मॉग की मोटी चादर तनी हुई है, जबकि कभी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर माना जाने वाला बीजिंग आज 70 AQI के आसपास सांस ले रहा है। कभी बीजिंग में AQI 700 के पार चला जाता था, लेकिन चीन सरकार ने सख्त नीतियां, टेक्नोलॉजी और कड़े नियम लागू कर हालात बदल दिए। इसके उलट दिल्ली-NCR में लोग रोज़ाना लगभग 40 सिगरेट पीने जितना प्रदूषण अपने फेफड़ों में भर रहे हैं। ICMR की हालिया रिसर्च ने चिंता और बढ़ा दी है, जिसमें साफ कहा गया है कि प्रदूषण की वजह से लंग कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
44 फीसदी शहरों में सांस लेना भी खतरे से खाली नहीं
हालात सिर्फ दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं हैं। देश के करीब 44 फीसदी शहर लंबे समय से ज़हरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। इसका असर केवल फेफड़ों तक नहीं रुकता, बल्कि शरीर के हर अंग पर पड़ रहा है। खून में घुले टॉक्सिन्स दिल तक पहुंचकर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा रहे हैं, तो दिमाग में जाकर डिमेंशिया, अल्ज़ाइमर और एंग्ज़ायटी जैसी समस्याओं को जन्म दे रहे हैं। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, अस्थमा, एलर्जी और आर्थराइटिस के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली-NCR लंग कैंसर के मामलों में देश में सबसे ऊपर हो सकता है।
धुआं और स्मॉग: शरीर पर दिखने लगे साफ लक्षण
प्रदूषण का असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में साफ नजर आने लगा है। गले में खराश, आंखों में जलन, कंजक्टिवाइटिस, नाक में खुजली, सूखी खांसी और ज़ुकाम आम हो गए हैं। कई लोगों को सीने में चुभन, स्किन एलर्जी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत रहती है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। बुज़ुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को खास तौर पर बाहर निकलने से बचने को कहा जा रहा है। मास्क का इस्तेमाल, घर में एयर प्यूरीफायर और पौष्टिक आहार को जरूरी बताया जा रहा है।
प्रदूषण से बचाव और डैमेज कंट्रोल के उपाय
योग गुरु स्वामी रामदेव के मुताबिक, सही खानपान और दिनचर्या से प्रदूषण के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आंवला, अखरोट, गुड़, नींबू जैसी चीजें शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाती हैं और फेफड़ों को मजबूती देती हैं। पर्याप्त पानी पीना, भाप लेना और गरारे करना भी फायदेमंद है। इसके अलावा घर और बालकनी में एरेका पाम, स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, स्पाइडर प्लांट और पीस लिली जैसे पौधे लगाने से घर के अंदर की हवा काफी हद तक साफ रह सकती है। अब ज़रूरत है कि सरकार भी चीन की तरह ठोस और सख्त कदम उठाए, ताकि साफ हवा में सांस लेने का सपना हकीकत बन सके।
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