मोबाइल से ब्रेन कैंसर होता है? वैज्ञानिकों की बड़ी स्टडी में सामने आई सच्चाई, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

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मोबाइल फोन के रेडिएशन से ब्रेन कैंसर होने की आशंका को लेकर वैज्ञानिकों की बड़ी स्टडी सामने आई है। 63 शोधों के विश्लेषण में मोबाइल इस्तेमाल और ब्रेन कैंसर के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला। विशेषज्ञों ने अफवाहों से बचने और संतुलित मोबाइल इस्तेमाल की सलाह दी है।

मोबाइल फोन आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। काम, पढ़ाई, मनोरंजन और बातचीत से लेकर ऑनलाइन भुगतान तक लगभग हर काम मोबाइल के जरिए हो रहा है। लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल के साथ एक सवाल भी लंबे समय से लोगों के मन में बना हुआ है कि क्या मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन ब्रेन कैंसर या ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ाता है? सोशल मीडिया पर इस तरह के कई दावे अक्सर वायरल होते रहते हैं। अब इस विषय पर वैज्ञानिकों की बड़ी स्टडी सामने आई है, जिसमें मोबाइल रेडिएशन और कैंसर के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।


मोबाइल रेडिएशन को लेकर क्या कहती है वैज्ञानिकों की स्टडी?

मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का हिस्सा होती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि हर तरह का रेडिएशन नुकसानदायक नहीं होता। मोबाइल से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगें कम ऊर्जा वाली होती हैं और इन्हें एक्स-रे जैसी हाई एनर्जी किरणों से अलग माना जाता है। इसी विषय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2019 में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव जानने के लिए 13 वैज्ञानिक समीक्षाएं करवाई थीं। हालिया विश्लेषण में इन्हीं अध्ययनों के निष्कर्षों का मूल्यांकन किया गया। वैज्ञानिकों को ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से मस्तिष्क, सिर या गर्दन के कैंसर का खतरा बढ़ता है।


63 अध्ययनों के विश्लेषण में नहीं मिला कैंसर का संबंध

ब्रेन कैंसर से जुड़े निष्कर्षों के लिए वैज्ञानिकों ने 1994 से 2022 के बीच प्रकाशित 63 अलग-अलग शोधों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि मोबाइल फोन के लंबे समय तक इस्तेमाल और ब्रेन कैंसर के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं है। शोध में यह भी सामने आया कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ा कि कोई व्यक्ति कितने वर्षों से मोबाइल इस्तेमाल कर रहा था या रोज कितनी देर तक फोन का उपयोग करता था। इसके अलावा रेडियो और टेलीविजन ट्रांसमिशन से निकलने वाली रेडियो तरंगों को भी कैंसर के बढ़े हुए खतरे से नहीं जोड़ा गया।


फिर भी मोबाइल इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानियां

हालांकि अध्ययन में कैंसर का कोई संबंध नहीं मिला, लेकिन विशेषज्ञ लंबे समय तक लगातार मोबाइल इस्तेमाल करने से बचने की सलाह देते हैं। देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित हो सकती है और आंखों पर भी असर पड़ सकता है। जरूरत पड़ने पर ईयरफोन या स्पीकर मोड का इस्तेमाल करना, स्क्रीन टाइम सीमित रखना और बच्चों के मोबाइल उपयोग पर निगरानी रखना बेहतर माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी दावों पर भरोसा करने से पहले वैज्ञानिक प्रमाणों को जरूर देखना चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल हर जानकारी सही हो, यह जरूरी नहीं है।

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