क्या टैटू की सुई बन सकती है 'साइलेंट किलर'? टैटू बनवाने से पहले हो जाएं सावधान! एक गलती से लिवर हो सकता है बर्बाद

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टैटू और पियर्सिंग से बढ़ सकता है हेपेटाइटिस का खतरा, एक्सपर्ट ने बताए बचाव के जरूरी उपाय

नई दिल्ली। टैटू और बॉडी पियर्सिंग आज युवाओं के बीच फैशन और अपनी पहचान जाहिर करने का लोकप्रिय माध्यम बन चुके हैं। लेकिन अगर इन्हें सुरक्षित तरीके से न कराया जाए तो यह हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। नोएडा के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मणिक शर्मा के अनुसार, संक्रमित या दोबारा इस्तेमाल की गई सुई और उपकरणों के जरिए वायरस सीधे खून में पहुंच सकते हैं, जिससे लिवर पर गंभीर असर पड़ सकता है।

कैसे बढ़ता है संक्रमण का खतरा?

विशेषज्ञ बताते हैं कि टैटू बनाते समय सुई बार-बार त्वचा में प्रवेश करती है। यदि सुई, इंक या अन्य उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज्ड न हों या एक से अधिक लोगों पर इस्तेमाल किए जाएं, तो हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और अन्य ब्लड-बॉर्न संक्रमण फैल सकते हैं। यही जोखिम बॉडी पियर्सिंग में भी मौजूद रहता है। इसलिए हमेशा प्रमाणित स्टूडियो का चयन करना और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कलाकार नई, सीलबंद सुई का ही उपयोग करे।

इन बातों का रखें खास ध्यान

डॉक्टरों की सलाह है कि टैटू या पियर्सिंग करवाने से पहले स्टूडियो की स्वच्छता, उपकरणों की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया और कलाकार द्वारा डिस्पोजेबल ग्लव्स के इस्तेमाल की जांच जरूर करें। हेपेटाइटिस-बी का टीका लगवाना भी संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। वहीं टैटू बनने के बाद उसकी सही देखभाल करना भी जरूरी है, ताकि बैक्टीरियल संक्रमण न हो और घाव जल्दी भर सके।

लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें

यदि टैटू या पियर्सिंग के बाद लगातार सूजन, मवाद, तेज दर्द, बुखार, त्वचा या आंखों का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से लिवर को होने वाले गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है। सही सावधानी बरतकर टैटू और पियर्सिंग को सुरक्षित बनाया जा सकता है, लेकिन लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है।

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