अस्थमा को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, गंभीर अटैक में जा सकती है जान, जानें बचाव और जरूरी सावधानियां

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अस्थमा अटैक अचानक गंभीर हो सकता है। ऐसे समय सीधे बैठना, डॉक्टर के बताए रिलीवर इनहेलर का सही इस्तेमाल करना और हालत न सुधरने पर तुरंत आपातकालीन मदद लेना जरूरी है। जानिए अस्थमा अटैक के संकेत, तत्काल उपाय और किन परिस्थितियों में अस्पताल जाना चाहिए।

अस्थमा सांस से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस की नलियों में सूजन और सिकुड़न के कारण सांस लेने में परेशानी हो सकती है। खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न और घरघराहट इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। धूल, धुआं, वायु प्रदूषण, ठंडी हवा, एलर्जी और संक्रमण जैसी चीजें कुछ लोगों में लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। गंभीर स्थिति में अस्थमा अटैक जानलेवा भी हो सकता है, इसलिए इसके संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हाल में कुआलालंपुर से सिडनी जा रही मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान में एक 58 वर्षीय भारतीय यात्री की मेडिकल इमरजेंसी के बाद मौत हो गई। रिपोर्टों में इसे अस्थमा अटैक से जोड़कर बताया गया है, हालांकि पुलिस ने घटना को मेडिकल एपिसोड बताया है। विमान में यात्रियों और चालक दल ने प्राथमिक मदद देने की कोशिश की, लेकिन यात्री को बचाया नहीं जा सका।


अस्थमा अटैक के दौरान शरीर में क्या होता है?

अस्थमा अटैक के दौरान सांस की नलियां संकरी हो सकती हैं। उनमें सूजन बढ़ने के साथ बलगम भी जमा हो सकता है। इसकी वजह से हवा का फेफड़ों तक पहुंचना और बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। मरीज को अचानक सांस फूलने, सीने में जकड़न, खांसी या घरघराहट जैसी समस्या बढ़ती हुई महसूस हो सकती है। अलग-अलग लोगों में इसके लक्षण और उनकी गंभीरता अलग हो सकती है। धुआं, प्रदूषण, परागकण, धूल, ठंडी हवा, संक्रमण और शारीरिक गतिविधि कुछ लोगों में लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। गंभीर अटैक में सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो सकती है और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद जरूरी है।


अटैक आए तो सबसे पहले क्या करें?

अगर अस्थमा का अटैक महसूस हो तो सबसे पहले सीधे बैठें और शांत रहने की कोशिश करें। इसके बाद अपने डॉक्टर की सलाह के मुताबिक रिलीवर इनहेलर का इस्तेमाल करें। इनहेलर का सही तरीका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गलत तकनीक से दवा की पर्याप्त मात्रा फेफड़ों तक नहीं पहुंच सकती। यदि डॉक्टर ने इनहेलर के साथ स्पेसर इस्तेमाल करने की सलाह दी है तो उसका उपयोग किया जा सकता है। हर मरीज के लिए दवा और उसकी मात्रा अलग हो सकती है, इसलिए अपने डॉक्टर की ओर से दिए गए अस्थमा एक्शन प्लान का पालन करना सबसे सुरक्षित तरीका है।


कब तुरंत इमरजेंसी मदद लेनी चाहिए?

अगर इनहेलर लेने के बाद भी सांस लेने में सुधार नहीं हो रहा है, लक्षण लगातार बढ़ रहे हैं या मरीज के पास रिलीवर इनहेलर ही नहीं है, तो इंतजार नहीं करना चाहिए और तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा की मदद लेनी चाहिए। गंभीर अटैक तेजी से बिगड़ सकता है और अस्पताल में ऑक्सीजन, नेबुलाइजर या अन्य उपचार की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खों या अपनी तरफ से कोई दूसरी दवा लेकर इलाज में देरी करना उचित नहीं है।


रोजमर्रा में इन बातों का रखें ध्यान

अस्थमा से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के मुताबिक अपनी दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से इस्तेमाल करने चाहिए। इनहेलर हमेशा अपने पास रखना भी उपयोगी है। जिन चीजों से लक्षण बढ़ते हैं, उनसे बचने की कोशिश करनी चाहिए। बार-बार इनहेलर की जरूरत पड़ रही हो या लक्षण सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर रहे हों तो डॉक्टर से उपचार की समीक्षा करानी चाहिए। अस्थमा को केवल घरेलू उपायों से नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सही उपचार और नियमित चिकित्सकीय निगरानी से अटैक का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

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