मल्टीग्रेन आटा बनाने का आसान तरीका, गेहूं में मिलाएं ये 2 चीजें और बढ़ाएं रोटियों का प्रोटीन

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घर पर गेहूं के आटे में सोयाबीन का आटा और बेसन मिलाकर पौष्टिक मल्टीग्रेन आटा तैयार किया जा सकता है। इसमें पालक या मेथी मिलाने से फाइबर और अन्य पोषक तत्व बढ़ाने में मदद मिल सकती है। जानें आसान तरीका और संभावित फायदे।

सेहतमंद रहने के लिए संतुलित और पौष्टिक खानपान जरूरी है। इसके लिए सिर्फ फल और सब्जियां खाना ही नहीं, बल्कि रोजाना खाए जाने वाले भोजन को भी पोषण से भरपूर बनाना फायदेमंद हो सकता है। भारतीय घरों में रोटी रोज के खाने का अहम हिस्सा है और ज्यादातर लोग गेहूं के आटे से बनी रोटियां खाते हैं। अगर आप अपनी रोजाना की रोटी को ज्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो गेहूं के आटे में सोयाबीन का आटा और बेसन मिलाकर मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं। इसमें पालक या मेथी जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी शामिल की जा सकती हैं। इन चीजों को मिलाने से रोटियों में प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं घर पर मल्टीग्रेन आटा बनाने का आसान तरीका और इसके संभावित फायदे।


गेहूं के आटे में मिलाएं सोयाबीन का आटा और बेसन

घर पर मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए 10 किलो गेहूं के आटे में 1 किलो सोयाबीन का आटा और 1 किलो बेसन अच्छी तरह मिला लें। सभी सामग्रियों को इस तरह मिलाएं कि मिश्रण एकसार हो जाए। यदि आप कम मात्रा में आटा तैयार करना चाहते हैं, तो इसी अनुपात को अपनाकर छोटी मात्रा में भी मिश्रण बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक किलो गेहूं के आटे में 100 ग्राम सोयाबीन का आटा और 100 ग्राम बेसन मिलाया जा सकता है। तैयार मिश्रण को साफ और सूखे, एयरटाइट डिब्बे में रखें। जरूरत के अनुसार आटा निकालकर गूंथें और रोटियां बनाएं। सोयाबीन और बेसन मिलाने से गेहूं के आटे की तुलना में प्रोटीन की मात्रा बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक पोषण सामग्री इस्तेमाल किए गए आटे की किस्म और मात्रा पर निर्भर करेगी।


सोयाबीन और बेसन से मिल सकता है अतिरिक्त प्रोटीन

सोयाबीन को प्रोटीन के अच्छे स्रोतों में गिना जाता है, जबकि बेसन में भी प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है। इन दोनों को गेहूं के आटे में मिलाने से रोजाना के भोजन में प्रोटीन शामिल करने का एक आसान विकल्प मिल सकता है। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के रखरखाव और ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, फाइबर पाचन क्रिया को सामान्य बनाए रखने और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इस मिश्रण से बनी रोटियों का स्वाद, रंग और बनावट सामान्य गेहूं की रोटी से कुछ अलग हो सकती है। इसलिए शुरुआत में कम मात्रा में मिश्रण तैयार करके देखना उपयोगी रहेगा कि उसका स्वाद परिवार को पसंद आता है या नहीं। ध्यान रखें कि संतुलित आहार के लिए केवल रोटी पर निर्भर रहने के बजाय दाल, सब्जियां, फल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी शामिल करना जरूरी है।


पालक और मेथी मिलाकर बढ़ाएं रोटियों की पौष्टिकता

मल्टीग्रेन आटे को और पौष्टिक बनाने के लिए उसमें पालक या मेथी जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी मिलाई जा सकती हैं। इन सब्जियों को अच्छी तरह धोकर बारीक काट लें और आटा गूंथते समय सीमित मात्रा में शामिल करें। आप चाहें तो ताजी पत्तियों को बारीक पीसकर भी आटे में मिला सकते हैं। पालक और मेथी से रोटियों में फाइबर, विटामिन और खनिजों की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सब्जियों में मौजूद पोषक तत्वों की वास्तविक मात्रा इस्तेमाल की गई मात्रा और पकाने के तरीके पर निर्भर करेगी। बहुत ज्यादा हरी सब्जियां डालने से आटा अधिक गीला हो सकता है, जिससे रोटी बेलने में परेशानी आ सकती है। इसलिए जरूरत के अनुसार पानी डालें और आटे को अच्छी तरह गूंथें। इस तरह गेहूं, सोयाबीन, बेसन और हरी पत्तेदार सब्जियों का इस्तेमाल करके रोजाना की रोटी में विविधता लाई जा सकती है।


मल्टीग्रेन रोटी को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाएं

गेहूं के आटे में सोयाबीन का आटा, बेसन और जरूरत के अनुसार पालक या मेथी मिलाकर तैयार रोटियां रोजाना के भोजन को अधिक पौष्टिक बनाने का एक विकल्प हो सकती हैं। सोयाबीन और बेसन से प्रोटीन बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जबकि हरी पत्तेदार सब्जियां फाइबर, विटामिन और खनिज उपलब्ध कराती हैं। फाइबर पर्याप्त मात्रा में लेने से पाचन और पेट भरा रहने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मल्टीग्रेन रोटी अपने आप में किसी बीमारी का इलाज नहीं है और इसके फायदे पूरे खानपान पर निर्भर करते हैं। आटे को ताजा और सूखी जगह पर रखें, साफ पानी से गूंथें और जरूरत के मुताबिक ही तैयार करें। यदि किसी व्यक्ति को सोयाबीन या चने से एलर्जी है, तो संबंधित सामग्री इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। संतुलित मात्रा में मल्टीग्रेन रोटी को दाल, दही और सब्जियों के साथ खाने से रोजाना के भोजन में पोषक तत्वों की विविधता बढ़ाई जा सकती है।

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