ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर, कहा- चीन और रूस की गतिविधियों से हमें खतरा, इसलिए यहां कंट्रोल जरूरी!
- Shiv Kumar
- 20 Jan, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वे किसी भी सूरत में ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। ट्रंप ने इस संभावना को भी खारिज कर दिया है कि यूरोपीय संघ उनके इस कदम का कड़ा विरोध करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब डेनमार्क ने आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है। ट्रंप के इस रुख से न सिर्फ अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में तनाव बढ़ा है, बल्कि NATO जैसे सैन्य गठबंधन की एकता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की यात्रा से पहले ट्रंप ने फिर दोहराया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है और इस पर उनका दावा पूरी तरह जायज है।
अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर कंट्रोल जरूरी: ट्रंप
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप लंबे समय से आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। फ्लोरिडा में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियां अमेरिका के लिए खतरा बन सकती हैं। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण से आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी। उन्होंने यूरोपीय संघ के विरोध को हल्के में लेते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि वे बहुत ज्यादा विरोध करेंगे। यह हमारे पास होना ही चाहिए।” ट्रंप हाल के महीनों में विदेश नीति के मोर्चे पर ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे हैं और वेनेजुएला में हुए सैन्य ऑपरेशन की सफलता के बाद उनका आत्मविश्वास और बढ़ा है। इसी वजह से ग्रीनलैंड को लेकर भी वे किसी तरह की नरमी दिखाने के मूड में नहीं हैं।
यूरोप में बढ़ी बेचैनी, सड़कों पर उतरे लोग
ट्रंप के बयानों के बाद यूरोप के कई देशों में चिंता साफ नजर आ रही है। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन और ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में लोगों ने अमेरिका के इस रुख के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। यूरोपीय यूनियन के नेता भी ट्रंप की मंशा को लेकर सतर्क हैं और हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका ने दबाव और बढ़ाया, तो यूरोप एकजुट होकर इसका जवाब दे सकता है। ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते विवाद ने ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में नई दरार पैदा कर दी है। NATO के भीतर भी इस मुद्दे पर असहजता देखी जा रही है, क्योंकि डेनमार्क NATO का अहम सदस्य है और उस पर सीधा दबाव गठबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।
टैरिफ बम से ट्रंप का दबाव, EU जवाबी कार्रवाई की तैयारी में
ग्रीनलैंड विवाद के बीच ट्रंप ने यूरोप पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर माहौल और गर्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटेन, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और फिनलैंड ने उनके कदम का विरोध किया, तो 1 फरवरी से इन देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा। यह टैक्स 1 जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। यूरोपीय नेताओं ने इस फैसले को “अस्वीकार्य” बताते हुए डेनमार्क के समर्थन में खड़े होने की बात कही है। वहीं खबर है कि यूरोपीय संघ भी ट्रंप प्रशासन के नए आयात शुल्कों के खिलाफ जवाबी कदमों पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
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