भारत पर अमेरिका का भारी-भरकम टैरिफ आज से खत्म, 30 लाख करोड़ डॉलर का खुलेगा बाजार
- Shiv Kumar
- 07 Feb, 2026
नोएडा। भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) का फ्रेमवर्क जारी होने के बाद दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिली है। इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ में बड़ी राहत दी गई है और कई क्षेत्रों में बाजार पहुंच आसान होने वाली है। सरकार का कहना है कि इससे भारतीय निर्यातकों, खासकर MSME, किसानों और छोटे उद्योगों को बड़ा फायदा होगा। दोनों देशों ने यह भी साफ किया है कि यह समझौता आगे चलकर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का आधार बनेगा, जिससे निवेश और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी।
टैरिफ कटौती से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैक्स को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैक्स भी हटाया गया है। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा अमेरिकी बाजार में मजबूत होगी। सरकार का कहना है कि इस फैसले से टेक्सटाइल, फुटवियर, मशीनरी, रसायन, हस्तशिल्प और दवा उद्योग को खास लाभ मिलेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस समझौते से भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के विशाल बाजार तक पहुंच आसान होगी और लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाने और बाजार पहुंच बढ़ाने पर जोर
दोनों देशों ने व्यापार में आने वाली नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करने पर भी सहमति जताई है। भारत ने अमेरिकी मेडिकल डिवाइस, आईटी और टेक्नोलॉजी उत्पादों के आयात से जुड़े लाइसेंस और मानक प्रक्रियाओं को आसान बनाने का भरोसा दिया है। इससे अमेरिकी कंपनियों को भारत में कारोबार करने में आसानी होगी, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर तकनीक कम कीमत पर मिल सकेगी। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी मानकों और टेस्टिंग को मान्यता देने पर भी काम किया जाएगा, जिससे दोबारा जांच की जरूरत कम होगी और व्यापारिक प्रक्रिया तेज होगी।
कृषि और डेयरी सेक्टर को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ा समझौता
सरकार ने साफ किया है कि इस समझौते में भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। मक्का, गेहूं, चावल, दूध, पोल्ट्री और अन्य संवेदनशील उत्पादों पर अमेरिका को कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई। हालांकि कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने पर सहमति बनी है। साथ ही भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, विमान, तकनीकी और अन्य उत्पाद खरीदने की घोषणा भी की है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






