ईरान और इजरायल के बीच जंग से भारतीय शेयर बाजार में मची तबाही, निफ्टी 500 अंक तो सेंसेक्स 2000 अंक टूटा, लाखों करोड़ रुपये स्वाहा

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ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखा। सेंसेक्स 2700 अंक से ज्यादा टूटा और निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। हफ्ते की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई और निवेशकों में घबराहट साफ नजर आई। सुबह कारोबार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स 2743 अंक यानी 3.38% टूटकर 78,543 पर खुला, जबकि Nifty 50 519 अंक गिरकर 24,659 पर पहुंच गया। बैंक निफ्टी में भी 1300 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोपहर 12.25 बजे तक कुछ रिकवरी दिखी और सेंसेक्स करीब 1500 अंक की गिरावट के साथ 79,790 पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 24,727 के आसपास ट्रेड कर रहा था। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की चिंताएं लगातार बनी रहीं।



तेल की कीमतों में उछाल, 100 डॉलर का खतरा

वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि जंग और आगे बढ़ती है तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर सीधा पड़ेगा। सेक्टरवार देखें तो ऑटो, एफएमसीजी, आईटी, बैंकिंग, हेल्थकेयर और फाइनेंशियल शेयर लाल निशान पर रहे। सिर्फ मेटल सेक्टर में हल्की मजबूती दिखी, क्योंकि निवेशक सेफ एसेट की ओर रुख कर रहे हैं। बीएसई टॉप 30 में 29 शेयर गिरावट में रहे, केवल बीईएल में करीब 1 फीसदी की बढ़त रही। इंडिगो, एलएंडटी और अडानी पोर्ट्स जैसे दिग्गज शेयरों में 3 से 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।


निवेशकों के 9 लाख करोड़ स्वाहा, एशियाई बाजार भी लुढ़के

भारी बिकवाली के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप 463.50 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 454.60 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यानी निवेशकों की संपत्ति में लगभग 9 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज हुई। बीएसई पर एक्टिव 3,660 शेयरों में से 2,985 गिरावट में रहे, जबकि 162 शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गए। एशियाई बाजारों में भी दबाव दिखा। जापान का Nikkei 225 874 अंक टूटकर खुला। चीन का शंघाई समग्र सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी गिरावट में रहे। वहीं ताइवान स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक 2.3 फीसदी तक लुढ़क गया। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

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