ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर इजराइल ने किया हमला, यूरेनियम प्लांट को बनाया निशाना, ईरानी विदेश मंत्री बोले- चुकानी होगी भारी कीमत
- Shiv Kumar
- 28 Mar, 2026
दुनिया की नजर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प ने मियामी बीच में एक कार्यक्रम के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को मजाक में ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रम्प’ कह दिया, जिसके बाद यह बयान चर्चा का विषय बन गया। हालांकि उन्होंने तुरंत इसे अपनी गलती बताते हुए हंसकर बात टाल दी, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ईरान को लेकर कई बड़े दावे भी किए। ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब पहले जितना मजबूत नहीं रहा और अमेरिकी हमलों के बाद उसकी सैन्य ताकत कमजोर हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान में अभी भी हजारों लक्ष्य बचे हैं, जिन पर कार्रवाई की जा सकती है। इस बीच क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
ईरान के पास सैन्य दबाव बढ़ाने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ईरान के पास अपना एक और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर सकता है। बताया जा रहा है कि यह पोत मिडिल ईस्ट क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी सैन्य कमांड के तहत भेजा जाएगा। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह पहले से मौजूद कैरियर्स के साथ काम करेगा या उनकी जगह लेगा। दूसरी ओर, नरेंद्र मोदी और ट्रम्प के बीच हाल ही में हुई बातचीत भी चर्चा में है, जिसमें इलॉन मस्क की मौजूदगी की बात सामने आई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मस्क ने बातचीत में कोई भूमिका निभाई या नहीं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमले और जवाबी कार्रवाई से बढ़ा तनाव
ईरान के बुशेहर परमाणु ऊर्जा प्लांट पर हाल ही में फिर हमला हुआ है, जिसे लेकर ईरान ने अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी इस हमले की जानकारी मिलने की पुष्टि की है। इसके अलावा इजराइल ने ईरान के स्टील कारखानों और अन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने तेल अवीव पर मिसाइल हमला किया। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है।
ईरान का सख्त रुख, अमेरिका पर आरोप
ईरान ने साफ कहा है कि वह हर हमले का उसी तरह जवाब देगा। वहां के लोगों और नेताओं का मानना है कि अमेरिका पहले दबाव बनाता है और फिर बातचीत की बात करता है। ईरान का कहना है कि उसे अब अमेरिका पर भरोसा नहीं रहा और वह अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रम्प ने इस स्थिति को ‘जंग’ नहीं बल्कि ‘मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट’ बताया और कहा कि युद्ध घोषित करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक बिना औपचारिक मंजूरी के यह अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान माना जा रहा है।
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