हॉर्मुज से भारत आ रहा था जहाज, ईरान ने रोका, बिना इजाजत गुजरने का आरोप
- Shiv Kumar
- 22 Apr, 2026
मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट में भारत की ओर आ रहे एक कंटेनर जहाज को रोककर अपने कब्जे में ले लिया है। लाइबेरिया के झंडे वाला एपामिनोडेस नाम का यह जहाज गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की तरफ जा रहा था। ईरान का आरोप है कि जहाज बिना अनुमति समुद्री रास्ते से गुजर रहा था और उसके नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की गई थी, जिससे सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।
दो जहाज जब्त, एक पर हमला, समुद्री रास्ते पर बढ़ा खतरा
ईरान ने सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि फ्रांसेस्का नाम के एक और जहाज को भी जब्त किया है, जबकि यूफोरिया नाम के जहाज पर हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तीन जहाजों पर फायरिंग भी हुई है, जिनमें से कुछ को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, क्रू मेंबर्स सुरक्षित बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम से दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक पर खतरा और बढ़ गया है, जिसका असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तान की अपील पर सीजफायर बढ़ाने का फैसला
इसी बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया है कि अमेरिका, पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने ईरान पर हमले रोकने की अपील की थी, ताकि बातचीत का रास्ता खुल सके। ट्रम्प ने कहा कि फिलहाल अमेरिकी सेना को हमला रोकने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन उसे पूरी तरह तैयार रहने को भी कहा गया है।
दुनिया भर में हलचल, बैठक और चेतावनियां जारी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए कई देशों की बैठक बुलाई गई है। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नाकेबंदी को लेकर अमेरिका की आलोचना की है। उधर, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी चेतावनी दी है कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और आगे हालात और बिगड़ सकते हैं।
भारत पर भी दिखने लगा असर
इस तनाव का असर भारत में भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई प्रभावित हो रही है। खासतौर पर एल्यूमिनियम की सप्लाई रुकने से डिब्बाबंद पेय पदार्थों की कमी होने लगी है। बताया जा रहा है कि कुछ उत्पादों की उपलब्धता कम हो गई है और सप्लाई सीमित कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर और ज्यादा क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
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