'पागलों के हाथ में एटम बम नहीं दे सकते, ' ट्रंप ने जंग रोकने के लिए ईरान का प्रस्ताव ठुकराया, परमाणु मुद्दे का जिक्र न होने पर फैसला

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। होर्मुज संकट, समुद्री नाकाबंदी और लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान दोनों ओर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। फ्लोरिडा में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो इजराइल, मिडिल ईस्ट और यूरोप बड़े खतरे में आ जाते। ट्रम्प ने कहा कि “हम पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं जाने दे सकते।” उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव को अमेरिका ने फिर खारिज कर दिया है, क्योंकि उसमें परमाणु कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट बात नहीं की गई थी। व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान पहले अपने एनरिच्ड यूरेनियम को सौंपे और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमत हो। वहीं ईरान सिर्फ समुद्री रास्ता खोलने की बात कर रहा है और परमाणु मुद्दे पर बाद में चर्चा चाहता है।


होर्मुज संकट और समुद्री नाकाबंदी से बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब समुद्री मोर्चे पर भी गहरा गया है। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई से ईरान की तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। पेंटागन के अनुसार, अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी से ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी लगभग ठप हो गई है। जहां पहले रोज करीब 130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो कंपनियां ईरान को होर्मुज से गुजरने के लिए भुगतान करेंगी, उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसी बीच ट्रम्प ने मजाकिया अंदाज में क्यूबा पर कार्रवाई का भी जिक्र किया और कहा कि ईरान के बाद क्यूबा अगला मुद्दा हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ताश के पत्तों वाली तस्वीर पोस्ट कर यह संकेत भी दिया कि हालात पर उनका नियंत्रण मजबूत है।


ईरान में दबाव बढ़ा, अमेरिका में भी राजनीतिक विवाद

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर अमेरिका धमकी भरी भाषा बंद करे तो बातचीत फिर शुरू हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है। दूसरी ओर अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरानी नेतृत्व को लेकर बेहद तीखा बयान दिया, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बीच ईरान के अंदर भी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति पजशकियान और संसद अध्यक्ष गालिबाफ विदेश मंत्री अराघची से नाराज हैं। वहीं अमेरिका में भी ट्रम्प की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। डेमोक्रेट नेताओं के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसद भी बिना संसदीय मंजूरी के सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प ने हालांकि साफ कहा कि उन्हें ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ जंग अब खत्म हो चुकी है, इसलिए वॉर पावर्स एक्ट की समय सीमा उन पर लागू नहीं होती। 

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