ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रम्प-नेतन्याहू में टकराव, इजराइल बोला- हमला नहीं रुकना चाहिए, अमेरिका चाहता है डील
- Shiv Kumar
- 21 May, 2026
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान पर हमलों को लेकर अलग-अलग रणनीति दिखाई दे रही है। एक ओर नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में हैं, वहीं ट्रम्प फिलहाल बातचीत और संभावित समझौते को मौका देना चाहते हैं। इसी बीच युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार, मध्य पूर्व की सुरक्षा और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। अमेरिका में भी ट्रम्प की ईरान नीति का विरोध तेज हो गया है। पूर्व सैनिकों और कुछ सांसदों ने सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ ईरान लगातार सख्त बयान दे रहा है और दावा कर रहा है कि उसके पास अभी कई आधुनिक हथियार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है।
अमेरिका में ट्रम्प की नीति का विरोध बढ़ा, संसद में प्रस्ताव पास
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई, जिसमें नेतन्याहू ने ईरान पर हमले रोकने को गलती बताया। हालांकि ट्रम्प ने कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों की अपील के बाद प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई टाल दी। इसी बीच अमेरिकी सीनेट में ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 से पास हुआ। अगर यह कानून बनता है तो ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान के लिए ट्रम्प को कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। वॉशिंगटन डीसी में युद्ध विरोधी प्रदर्शन भी हुए, जहां पूर्व सैनिकों और डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रम्प प्रशासन के फैसलों का विरोध किया। दूसरी ओर ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
तेल बाजार में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता
ईरान युद्ध का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष बढ़ा तो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ईरान ने दावा किया कि उसकी मंजूरी के बाद 24 घंटे में 26 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। वहीं यूएई इस रास्ते को बायपास करने के लिए नई पाइपलाइन तैयार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज में संकट बढ़ा तो दुनिया में खाद्य संकट और महंगाई बढ़ सकती है। श्रीलंका के चाय उद्योग पर भी इसका असर दिखने लगा है। निर्यात घटने और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से वहां की कंपनियां और मजदूर दबाव में हैं। अमेरिका और इजराइल की रणनीति को लेकर भी नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की योजना पर भी चर्चा हुई थी।
ईरान का दावा- अभी कई सीक्रेट हथियार बाकी
ईरान ने अमेरिका की धमकियों के बीच कहा है कि उसके पास कई ऐसे आधुनिक हथियार हैं, जिन्हें अभी युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया गया। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अगर दोबारा हमला हुआ तो इस बार जवाब और ज्यादा आक्रामक होगा। इसी दौरान ईरान ने दो लोगों को फांसी भी दी, जिन पर आतंकी संगठन से जुड़े होने और देश विरोधी गतिविधियों के आरोप थे। दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन की फंडिंग और राहत वितरण को लेकर जांच शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राहत केंद्रों के आसपास हुई हिंसा और फंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान-अमेरिका तनाव पर चर्चा की। लगातार बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






