फिर जंग की तैयारी में जुटा ईरान, कहा- अमेरिका पर भरोसा नहीं, होर्मुज स्ट्रेट हमारा सबसे बड़ा हथियार

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को रणनीतिक हथियार बताते हुए सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। ड्रोन पर कार्रवाई और मध्य पूर्व में बढ़ती सैन्य गतिविधियों से नए संघर्ष की आशंका तेज हो गई है।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है। ईरानी नेतृत्व को अमेरिका पर भरोसा नहीं है और वह होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मान रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है, इसलिए ईरान इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने के अहम हथियार के तौर पर देख रहा है।


रिपोर्ट के अनुसार ईरान इस समय तीन मोर्चों पर काम कर रहा है। इनमें सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन मजबूत करना और कूटनीतिक रणनीति शामिल है। हालांकि बातचीत का रास्ता अभी खुला रखा गया है, लेकिन ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अगर नया संघर्ष शुरू होता है तो अमेरिका के सैन्य ठिकानों, ऊर्जा ढांचे और उससे जुड़े हितों को निशाना बनाया जा सकता है।


अमेरिकी ड्रोन और लड़ाकू विमान पर कार्रवाई का दावा

ईरान ने दावा किया है कि उसकी फोर्स ने अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाया। इसमें एमक्यू-9बी और आरक्यू-4 ड्रोन शामिल बताए गए हैं। साथ ही ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसे एफ-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि अमेरिका की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस बीच ईरान में 88 दिनों बाद आंशिक रूप से इंटरनेट सेवाएं बहाल हुई हैं। लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से कारोबार और डिजिटल सेवाओं पर असर पड़ा। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा अधिकारियों के साथ सुरक्षा बैठक कर उत्तरी सीमा और लेबनान की स्थिति की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले भी तेज किए गए हैं।


होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र

अमेरिका ने भी हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के पास कार्रवाई तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना ने बारूदी सुरंग बिछाने वाली ईरानी नौकाओं और बंदर अब्बास स्थित मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

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