होर्मुज तनाव पर इजरायली राजदूत की चेतावनी, भारत समेत दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराया खतरा, कहा- होर्मुज में तनाव बढ़ने पर ठप हो जाएगी ग्लोबल इकोनॉमी

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होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर इजरायली राजदूत की चेतावनी ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। बढ़ते तनाव का असर तेल आपूर्ति, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने चेतावनी दी है कि होर्मुज केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े हिस्से की तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में यदि यहां किसी प्रकार का संकट पैदा होता है तो उसके प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तुरंत दिखाई दे सकते हैं। अजार ने यह भी कहा कि भारत पश्चिम एशिया में स्थिरता और आर्थिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, इसलिए क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का असर भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।


दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माने जाने वाले इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हाल के महीनों में क्षेत्र में जहाजों पर हमले, ड्रोन गतिविधियों और नौसैनिक तनाव की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इजरायली राजदूत ने भी समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया है।


भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है सीधा असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने की स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समुद्री यातायात प्रभावित होता है या तेल आपूर्ति में बाधा आती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों से लेकर परिवहन, उद्योग और महंगाई तक महसूस किया जा सकता है। आयात लागत बढ़ने से देश की आर्थिक योजनाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी पहले कह चुके हैं कि आधुनिक दौर में किसी संघर्ष क्षेत्र से भौगोलिक दूरी होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके प्रभावों से बचा जा सकेगा।


क्षेत्रीय स्थिरता पर बढ़ा वैश्विक फोकस

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक समुदाय का ध्यान ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा की ओर खींचा है। जानकारों का मानना है कि यदि क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते हैं तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसे में भारत सहित कई देशों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति मार्गों पर भी ध्यान दें। फिलहाल दुनिया की नजरें होर्मुज क्षेत्र की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

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