नेतन्याहू पर क्यों बरसे ट्रंप? कॉल पर लगाई कड़ी फटकार, कहा- पागल हो गए हो क्या, तुरंत ये सब रोको

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक चिंता गहरा रही है। ट्रम्प-नेतन्याहू बातचीत, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और समुद्री सुरक्षा के मुद्दों ने ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संभावित असर की आशंकाएं बढ़ा दी हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत को लेकर कई नए दावे सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर दोनों नेताओं के बीच तीखी चर्चा हुई। दूसरी ओर, ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी असर डालने की आशंका बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज क्षेत्र में स्थिति और बिगड़ती है तो इसका सीधा प्रभाव तेल आपूर्ति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।


होर्मुज को लेकर क्यों बढ़ रही वैश्विक चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव, समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और विभिन्न देशों के बयानों ने चिंता को और बढ़ा दिया है। भारत में इजराइली राजदूत रूवेन अजार ने भी कहा कि होर्मुज सिर्फ पश्चिम एशिया का नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। उनका मानना है कि किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से कई देश क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।


अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ी कूटनीतिक हलचल

रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियों के बाद अमेरिका और इजराइल के संबंधों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। वहीं ईरान ने भी क्षेत्रीय हालात पर अपनी चिंता जाहिर की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे को लेकर आपात बैठक बुलाई गई, जहां कई देशों ने संयम बरतने की अपील की। दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत तथा होर्मुज मार्ग को लेकर समझौते की संभावनाओं पर भी नजर रखी जा रही है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में होने वाले किसी भी राजनयिक फैसले का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।


भारत पर पड़ सकता है असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में यदि होर्मुज मार्ग प्रभावित होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसका असर पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत के साथ महंगाई पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल हालात पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

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