ट्रम्प का भारत पर बड़ा बयान, बोले- दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया, टैरिफ से हो रही कमाई, फिर भी मोदी के साथ करेंगे डील
- Shiv Kumar
- 05 Jun, 2026
नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने इस डील में अपने हित साध लिए, जबकि अमेरिका को वैसा फायदा नहीं मिला जैसा होना चाहिए था। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब अमेरिका में चुनावी माहौल फिर गरम है और वे व्यापार, शुल्क तथा वैश्विक सप्लाई चेन को अपने पुराने राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत के लिए यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी बाजार उसके निर्यातकों के लिए सबसे बड़े ठिकानों में गिना जाता है।
ट्रंप का निशाना और डील पर नई बहस
ट्रंप ने अपने अंदाज में यह दलील रखी कि भारत के साथ हुए सौदों में अमेरिकी कंपनियों को बराबरी का लाभ नहीं मिला। उनके मुताबिक, नई दिल्ली ने बातचीत में ज्यादा मजबूत स्थिति हासिल की और कई मामलों में शुल्क तथा बाजार पहुंच के मोर्चे पर बढ़त ले ली। अमेरिकी राजनीति में यह मुद्दा नया नहीं है, लेकिन ट्रंप ने इसे फिर सामने लाकर साफ संदेश दिया है कि वे भविष्य में भी ट्रेड डील्स को सख्त शर्तों के साथ देखना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, उनका फोकस खासकर उन सेक्टरों पर है जहां भारत ने अपने घरेलू हितों की रक्षा के लिए कड़े नियम बनाए। भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में व्यापारिक रिश्ते भले ही रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़े हों, लेकिन शुल्क, डिजिटल कारोबार और कृषि बाजार जैसे मुद्दों पर मतभेद बने रहे हैं। ट्रंप प्रशासन के समय भी भारत को जीएसपी सुविधा से हटाया गया था, जिसके बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में खिंचाव देखने को मिला। अब ट्रंप की ताजा टिप्पणी यह संकेत देती है कि अगर वे सत्ता में लौटते हैं, तो व्यापार समझौतों की भाषा और भी सख्त हो सकती है। भारतीय निर्यातक संगठनों की नजर इस बयान पर टिक गई है, क्योंकि किसी भी नई टैरिफ नीति का सीधा असर टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग सेक्टर पर पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर और आगे की तस्वीर
अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक रणनीति में दोनों देशों की साझेदारी लगातार गहरी हुई है। इसी वजह से ट्रंप के बयान को केवल व्यापारिक नाराजगी की तरह नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे आने वाले महीनों की राजनीतिक दिशा से भी जोड़ा जा रहा है। वॉशिंगटन में कई विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप चुनावी मंच से ऐसे बयान देकर अपने घरेलू समर्थकों को यह भरोसा देना चाहते हैं कि वे अमेरिकी उद्योग और रोजगार को प्राथमिकता देंगे। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह रिश्तों की व्यापकता को बनाए रखते हुए व्यापारिक दबाव से निपटे। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली इस पूरे मामले को फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी मानकर सावधानी से देख रही है। सरकार का रुख अब तक यही रहा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगा, लेकिन साथ ही अमेरिका के साथ सहयोग भी जारी रखेगा। आने वाले समय में यदि नई सरकार या नया प्रशासन व्यापार समझौतों पर फिर से बातचीत की कोशिश करता है, तो शुल्क में कटौती, बाजार पहुंच और बौद्धिक संपदा जैसे पुराने विवाद दोबारा तेज हो सकते हैं। फिलहाल ट्रंप का यह बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों की नई परीक्षा का संकेत माना जा रहा है।
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