अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ा विवाद, इजराइल से मतभेद गहराए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
- Shiv Kumar
- 19 Jun, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने समझौते का विरोध कर रहे इजराइली नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा है कि हर समस्या का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकता। वेंस का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान युद्धविराम समझौते के बाद आगे की बातचीत की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर इजराइल ने लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी जारी रखने का संकेत दिया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा।
जेडी वेंस बोले- सिर्फ ताकत से नहीं सुलझ सकती हर समस्या
पत्रकारों से बातचीत में जेडी वेंस ने कहा कि यदि वह इजराइल की सरकार का हिस्सा होते तो दुनिया के सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका पर इस तरह सवाल नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इजराइल के प्रति सबसे अधिक सहानुभूति रखने वाले नेताओं में हैं। वेंस ने इजराइल के कुछ मंत्रियों की आलोचना करते हुए कहा कि केवल लोगों को मारकर हर समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इजराइल जैसे छोटे देश के पास लंबे समय तक सैन्य विकल्पों के अलावा क्या रणनीति है। उनके इस बयान को अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
शांति समझौते के बाद नई वार्ता की तैयारी, लेकिन मतभेद बरकरार
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। समझौते के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों की अगली औपचारिक बैठक स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित है। हालांकि समझौते में शामिल शर्तों, विशेषकर लेबनान से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी भी मतभेद बने हुए हैं। इस बीच इजराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा। वहीं शांति समझौते के बावजूद लेबनान में इजराइली हमलों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे समझौते के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
तेल बाजार में राहत, लेकिन ट्रम्प को अपनी पार्टी से घेराव
समझौते का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर सामान्य होने लगी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन को अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई रिपब्लिकन नेताओं ने समझौते पर सवाल उठाते हुए इसे अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया है। वहीं ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने भी समझौते को सावधानीपूर्वक लागू करने की बात कही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति ला पाता है या नहीं।
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