क्या नेतन्याहू से दूरी बना रहे ट्रंप? रुबियो ने लेबनान को दिया सुरक्षा का भरोसा, मिडिल ईस्ट में बदले समीकरणों की चर्चा तेज
- Shiv Kumar
- 20 Jun, 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने लेबनान को लेकर बड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन से फोन पर बातचीत कर देश की सुरक्षा, स्थिरता और संप्रभुता के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई है। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब लेबनान लगातार अपनी जमीन पर इस्राइली सैन्य कार्रवाइयों को रोकने की मांग कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बातचीत क्षेत्र में बदलते समीकरणों और अमेरिका की नई रणनीति की ओर संकेत करती है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मार्को रुबियो ने बातचीत में कहा कि अमेरिका लेबनान की सुरक्षा और स्थिरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लेबनान सरकार का अधिकार देश के सभी हिस्सों में प्रभावी रूप से स्थापित होना चाहिए। साथ ही अमेरिका ने लेबनानी सेना और वैध सुरक्षा संस्थाओं को अपना समर्थन जारी रखने का भरोसा भी दिया है। ऐसे समय में यह समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
राष्ट्रपति आउन ने संघर्ष विराम को बताया सबसे बड़ी जरूरत
फोन वार्ता के दौरान लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने अमेरिका के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया, लेकिन साथ ही इस्राइली सैन्य कार्रवाई रोकने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापक संघर्ष विराम क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए बेहद जरूरी है। आउन का मानना है कि अगले सप्ताह वाशिंगटन में प्रस्तावित लेबनानी-अमेरिकी-इस्राइली वार्ता तभी सफल हो सकती है, जब जमीन पर हालात शांत हों।
राष्ट्रपति आउन ने कहा कि संघर्ष विराम केवल अस्थायी राहत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भविष्य की स्थायी शांति और कूटनीतिक समाधान की आधारशिला बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के जरिए ही क्षेत्रीय विवादों का समाधान संभव है।
वाशिंगटन वार्ता और युद्धविराम पर टिकी दुनिया की नजर
अगले सप्ताह वाशिंगटन में प्रस्तावित लेबनान, अमेरिका और इस्राइल के बीच होने वाली वार्ता को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक का उद्देश्य सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अन्य लंबित मुद्दों का समाधान तलाशना है। लेबनान सरकार चाहती है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इस बीच इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच हाल ही में लागू हुए संघर्ष विराम ने भी उम्मीदें बढ़ाई हैं। कूटनीतिक प्रयासों के बाद हुए इस समझौते से सीमा क्षेत्रों में तनाव कम होने की संभावना जताई जा रही है। यदि युद्धविराम लंबे समय तक कायम रहता है तो वाशिंगटन वार्ता के सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल अमेरिका, कतर और अन्य मध्यस्थ देश क्षेत्र में शांति बनाए रखने और संवाद को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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